किसानों की भलाई के लिए सरकार द्वारा उठाए गए हैं कई कदम: केन्द्रीय कृषि मंत्री

यह योजना पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट (पीएचएम) परियोजनाओं की स्थापना के लिए ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करती है.

  • PBNS
  • Publish Date - August 13, 2021 / 03:36 PM IST
किसानों की भलाई के लिए सरकार द्वारा उठाए गए हैं कई कदम: केन्द्रीय कृषि मंत्री
इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (IFPRI) के साउथ एशिया के पूर्व निदेशक और तीन कृषि अधिनियमों पर सुप्रीम कोर्ट पैनल के सदस्य पी के जोशी ने कहा कि कृषि से रिटर्न ग्रामीण आय के अनुरूप नहीं है क्योंकि खेत का आकार छोटा हो रहा है. गैर-कृषि क्षेत्र में आय के अवसर सीमित या नीचे जा रहे हैं.

देश में कृषि और किसानों से संबंधित कई कदम उठाए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य देश में कृषि का उत्थान और किसानों (Farmers) का जीवन स्तर को ऊंचा करना है. इस मानसून सत्र में कृषि से संबंधित कई सवाल पूछे गए, जिनके जवाब कृषि मंत्री ने संसद में दिए. केन्द्रीय मंत्री ने कहा है कि सरकार किसानों के हितों का पूरा ख्याल रखते हुए कई योजनाएं चल रही है. इन सवालों-जवाबों को समेटते हुए हम इस लेख में समझने की कोशिश करेंगे कि कृषि के क्षेत्र में क्या-क्या गतिविधियां चल रही हैं.

कृषि अवसंरचना कोष (AIF)

भारत सरकार ने देश में फसल के बाद के प्रबंधन (पीएचएम) और सामुदायिक कृषि परिसंपत्तियों से संबंधित कृषि अवसंरचना(infrastructure) को बढ़ावा देने के लिए कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) के तहत वित्तपोषण सुविधा शुरू की है। यह पूरी तरह केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है.

कृषि अवसंरचना कोष (AIF) का उद्देश्य

कृषि अवसंरचना कोष (एआईएफ) योजना का उद्देश्य कृषि अवसंरचना में सुधार के लिए प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता के माध्यम से फसल के बाद के प्रबंधन के लिए जरूरी परियोजनाओं में निवेश में मदद करना है. एआईएफ एक मध्यम-दीर्घकालिक ऋण वित्तपोषण सुविधा प्रदान करता है.

इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को ऋण के रूप में बैंकों/उधार देने वाली संस्थाओं द्वारा 1 लाख करोड़ रुपये की वित्तीय सुविधा वितरित की जानी है. यह वित्त पोषण सुविधा एपीएमसी को अपने बुनियादी ढांचे को उन्नत करने में मदद करेगी, जिससे अंततः किसानों को लाभ होगा. यह योजना पोस्ट हार्वेस्ट मैनेजमेंट (पीएचएम) परियोजनाओं की स्थापना के लिए ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जो बेहतर पोस्ट हार्वेस्ट प्रबंधन और खर्च की कमी में मदद करेगी.

जैविक खेती को बढ़ावा देना

सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (पीकेवीवाई) और पूर्वोत्तर क्षेत्र में मिशन ऑर्गेनिक वैल्यू चेन डेवलपमेंट (एमओवीसीडीएनईआर) की समर्पित योजनाओं के माध्यम से जैविक खेती को बढ़ावा दे रही है. किसानों को बीज, जैव उर्वरक, जैव कीटनाशकों, जैविक खाद, खाद / वर्मी-खाद, वनस्पति अर्क आदि जैसे जैविक आदानों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है. पीकेवीवाई में 31000 रुपये / हेक्टेयर 3 वर्ष के लिए और MOVCDNER के तहत 32500 / हेक्टेयर हर 3 वर्ष के लिए दिए जाते हैं.

उपरोक्त के अलावा, समूह/किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन, प्रशिक्षण, प्रमाणन, मूल्यवर्धन और उनके जैविक उत्पादों के मार्केटिंग के लिए भी सहायता प्रदान की जाती है. इसके अलावा, गंगा नदी के दोनों ओर जैविक खेती, प्राकृतिक खेती, बड़े क्षेत्र प्रमाणीकरण और व्यक्तिगत किसानों को जैविक उत्पादन बढ़ाने के लिए पीकेवीवाई के तहत सहायता दी जाती है.

भूमि धारक किसानों के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा देना

कृषि और किसान कल्याण विभाग 2016-17 से कृषि वानिकी पर उप-मिशन (SMAF) योजना चला रहा है. योजना के अन्तर्गत पौधरोपण क्रियाकलापों के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री जैसे बीज, पौध, क्लोन, उन्नत किस्मों के उत्पादन हेतु विभिन्न प्रकार की पौधशालाओं के विकास के साथ-साथ किसानों की गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री/बीज की आवश्यकता को पूरा करने के लिए वित्तीय सहायता का प्रावधान है. कैपेसिटी बिल्डिंग और प्रशिक्षण भी इस योजना के महत्वपूर्ण अंगों में से एक है. यह योजना केवल भूमि धारण करने वाले किसानों के लिए वृक्षारोपण को बढ़ावा देती है.

किसानों के बीच योजना के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आवंटित धन का 5% तक कैपेसिटी बिल्डिंग और प्रशिक्षण गतिविधियों जैसे कि किसानों/खेत श्रमिकों के प्रशिक्षण, कौशल विकास, जागरूकता अभियान, प्रकाशन, सेमिनार/कार्यशालाओं, सम्मेलन आदि के लिए उपयोग किया जाता है.

निर्यात योग्य फसलों का उत्पादन

सरकार ने एक व्यापक कृषि निर्यात नीति (एईपी), 2018 की घोषणा की है, जो किसान आधारित दृष्टिकोण पर केंद्रित है. यह नीति कृषि निर्यात की सुविधा और मूल्य वर्धित उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे को बढ़ावा देती है, जिससे निर्यात के लिए फसलें अधिक पैदा की जाएं.

एईपी किसानों को निर्यात योग्य फसलों को उगाने के लिए प्रोत्साहित करता है। ऐसी फसलें जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उच्च मांग है. इस योजना का मुख्य उद्देशय नाशवान, नवीन, स्वदेशी, जैविक, जातीय, पारंपरिक और गैर-पारंपरिक कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देना, जिससे किसानों को विदेशी बाजारों में निर्यात के अवसरों का लाभ मिल सके.

एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच)

सरकार बागवानी के क्षेत्र में एक केंद्र प्रायोजित योजना भी लागू कर रही है. बागवानी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए देश में फलों, सब्जियों, जड़ और कंद फसलों, मशरूम, मसालों, फूलों, सुगंधित पौधों, नारियल, काजू, कोक को एकीकृत बागवानी विकास मिशन (एमआईडीएच) में शामिल कर रही है. योजना के तहत किसानों और तकनीशियनों को प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इसके अलावा कई बोर्ड, चाय, कॉफी, रबर, काजू और नारियल आदि जैसे विभिन्न कृषि-वस्तुओं के उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए किसानों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.

हमें फॉलो करें

(मार्केट अपडेट और जाने अमीर कैसे बने सिर्फ आपके Money9 हिंदी पर)

लेटेस्ट वीडियो

Money9 विशेष