पश्चिमी राज्यों में बिजनेस सेंटीमेंट को नहीं रोक पाई कोरोना की दूसरी लहर

NCAER की बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स ने खुलासा किया है कि कोरोना की दूसरी लहर में भी पश्चिमी राज्यों में बिजनेस सेंटीमेंट पर असर नहीं पड़ा है.

पश्चिमी राज्यों में बिजनेस सेंटीमेंट को नहीं रोक पाई कोरोना की दूसरी लहर
टर्म लोन का इस्तेमाल आमतौर पर कैपिटल एक्सपेंडिचर को फाइनेंस करने के लिए किया जाता है. लैंडर तय रकम का एकमुश्त भुगतान करता है

नेशनल काउंसिल फॉर एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स ने खुलासा किया है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर में भी पश्चिमी राज्यों में बिजनेस सेंटीमेंट पर असर नहीं पड़ा. चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में अन्य राज्यों की तुलना में पश्चिमी राज्यों में कारोबार सही रहा. बीते मई माह में लगभग एक तिहाई जॉब्स महाराष्ट्र और गुजरात में आई हैं. हाल ही में आई ईपीएफओ (EPFO) की रिपोर्ट में भी जानकारी दी गई कि सभी आयुवर्ग में रोजगार देने में महाराष्ट्र सबसे आगे रहा. वहीं गुजरात भी इस सूची में शामिल है. दोनों राज्यों ने दूसरी लहर के सबसे खराब मई में कुल निकलीं जॉब्स में 31.89% की हिस्सेदारी दर्ज की.

इंडेक्स के अनुसार पूर्वी राज्यों में सबसे ज्यादा ‌प्रभाव देखने को मिला. इन राज्यों में 61.6 फीसदी तक की गिरावट आई है और यहां बेरोजगारी भी बढ़ी है. वहीं उत्तरी राज्यों में इंडेक्स ने 10.8 और दक्षिणी राज्यों में 50.6 फीसदी तक की गिरावट बताई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक यह इंडेक्स का दूसरा सबसे कम पैन-इंडिया डिप है.

फाइनेंशियल ईयर 2020-21 की अप्रैल-जून तिमाही में काफी गिरावट थी क्योंकि तब महामारी और लॉकडाउन ने पूरे देश को हैरान कर दिया था. हालांकि तब की तुलना में चालू ‌फाइनेंशियल ईयर 2021-22 अप्रैल से जून के बीच तिमाही में NCAER बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स 27.5% तक गिरावट दर्ज की है.

इस साल पहली तिमाही में फायदा

देश भर की 500 से भी ज्यादा फर्मों का सर्वे करने वाली 65 साल पुरानी NCAER ने कहा, “हाई फ्रिकवेंसी इंडीकेटर्स बताते हैं कि भले ही आर्थिक गतिविधि पिछले फाइनेंशियल ईयर के चौथी तिमाही इस साल की पहली तिमाही की तुलना में कम हुई है लेकिन इसने पिछले साल की पहली तिमाही में बेहतर प्रदर्शन किया.”

सर्विस सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित

रिपोर्ट के अनुसार सर्विस सेक्टर इंडेक्स में 35.3% की गिरावट आई है. जबकि कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में यह गिरावट करीब 32.9% रही. अगर अन्य सेक्टर की बात करें तो कैपिटल गुड (32.3%), इंटरमीडिएट गुड (17%) और कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल (14.3%) प्रभावित हुए.

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