e-Commerce Policy: टाटा और रिलायंस आए आमने-सामने, क्या है वजह?

Proposed e-Commerce Policy: रिलायंस ने सरकार के प्रस्ताव का समर्थन किया है कि किसी मार्केटप्लेस पर उसी के ग्रुप के प्रॉडक्ट्स नहीं बिकने चाहिए.

  • Money9 Hindi
  • Publish Date - August 21, 2021 / 01:57 PM IST
e-Commerce Policy: टाटा और रिलायंस आए आमने-सामने, क्या है वजह?
सुपर ऐप बना रहे टाटा ग्रुप ने हाल ही में सरकार को बताया कि रिलेटेड पार्टियों के साथ लिंक को प्रतिबंधित करने का काफी प्रभाव पड़ेगा

ई-कॉमर्स पॉलिसी (e-commerce policy) के एक नए प्रस्ताव को लेकर दो भारतीय कंपनियां आमने-सामने हैं. कंज्यूमर प्रोटेक्शन (इ-कॉमर्स रूल्स 2020) में प्रस्तावित संशोधन को लेकर उनमें टकराव हुआ है. रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने सरकार के इस विचार का समर्थन किया है कि मार्केटप्लेस एनटीटी (marketplace entity) के पास प्लेटफॉर्म पर सेलर्स के रूप में रिलेटेड पार्टियां या एसोसिएटेड एंटरप्राइजेज नहीं होने चाहिए. वहीं टाटा (Tata Group) ने सरकार के इस कदम का विरोध किया है.

टाटा ग्रुप ने अपने विरोध में क्या कहा?

सुपर ऐप बना रहे टाटा ग्रुप ने हाल ही में सरकार को बताया कि रिलेटेड पार्टियों के साथ लिंक को प्रतिबंधित करने का काफी प्रभाव पड़ेगा. उदाहरण के लिए, स्टारबक्स (टाटा के साथ जॉइंट वेंचर) जैसी कंपनियों के प्रोडक्ट को टाटा के स्वामित्व वाली वेबसाइट पर नहीं बेचा जा सकेगा. इसी तरह टाटा के वेंचर क्रोमा, वोल्टास और टाइटन पर भी यही नियम लागू होगा. हाल ही में एक कॉन्फ्रेंस में कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर पीयूष गोयल ने सरकार के तैयार किए गए ई-कॉमर्स ड्राफ्ट का विरोध करने के लिए टाटा ग्रुप पर निशाना साधा था.

रिलायंस ग्रुप ने किया ड्राफ्ट का समर्थन

इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले ऑनलाइन रिटेल बिजनेस जियो मार्ट ने अपने मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म पर केवल थर्ड पार्टी के सेलर्स के उत्पादों को होस्ट करने का फैसला किया है. ग्रुप ने मिनिस्ट्री ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स को अपने विचार से अवगत करा दिया है. ई-कॉमर्स नियमों का पालन करने के लिए रिलायंस को अपने मार्केटप्लेस मॉडल में बदलाव करना होगा. वर्तमान में, Jio Mart अपनी संबंधित कंपनियों के प्रोडक्ट भी बेचता है.

शिकायत के बाद सरकार ने तैयार किया ड्राफ्ट

ट्रेडिशनल स्ट्रीट-साइड बिजनेस करने वाले व्यापारियों ने शिकायत की थी कि बड़ी ऑनलाइन कंपनियां अपने मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म पर चुनिंदा विक्रेताओं को प्रमोट करती हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि कई ई-कॉमर्स कंपनियां ऐसी प्रथाओं का इस्तेमाल करती हैं, जो प्रतिस्पर्धा को कम कर सकती हैं. इन शिकायतों के बाद ई-कॉमर्स ड्राफ्ट नियम बनाए गए. सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया को एमेजॉन और फ्लिपकार्ट की एंटी कॉम्पिटिटिव प्रैक्टिस की जांच करने के लिए हरी झंडी दी है.

टाटा के समर्थन में क्या है तर्क?

टाटा का समर्थन करने वालों ने तर्क दिया है कि नियम परिवर्तन भले ही FDI वाले ई-कॉमर्स खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास के तौर पर पेश किया जा रहा है, लेकिन इससे भारतीय खिलाड़ियों को भी नुकसान हो सकता है. डोमेस्टिक रिटेल चेन के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि टाटा, बिड़ला और बजाज जैसे बड़े डायवर्सिफाइड इंडियन ग्रुप्स ने अपनी अलग-अलग कंपनियों के जरिए डायवर्स सेक्टर्स में प्रवेश करके कस्टमर इकोसिस्टम बनाया है. नए नियमों की वजह से इन्हें मॉडल बदलना पड़ेगा.

एनटीटी के नाम या ब्रांड के उपयोग पर भी प्रतिबंध

ई-कॉमर्स ड्राफ्ट में अन्य प्रतिबंधों का भी प्रस्ताव है. उदाहरण के लिए, मार्केटप्लेस ई-कॉमर्स एनटीटी अपने प्लेटफॉर्म पर उत्पादों या सेवाओं की बिक्री ऑफर करने के लिए एनटीटी के नाम या ब्रांड का उपयोग नहीं कर सकती. साथ ही, एक ई-कॉमर्स एनटीटी की परिभाषा का विस्तार इस तरह किया गया है कि यह डायवर्सिफाइड इंडियन ग्रुप्स को प्रभावित करेगा.

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