चीन की तरह भारत पर भी गहरा सकता है बिजली की कमी का संकट

Power Shortage: CEA के अनुसार, कुल पावर स्टेशनों में से 17 के पास शून्य मात्रा में स्टॉक था, जबकि उनमें से 21 के पास 1 दिन का स्टॉक था.

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  • Publish Date - October 7, 2021 / 02:14 PM IST
चीन की तरह भारत पर भी गहरा सकता है बिजली की कमी का संकट
भारत के पास विश्व स्तर पर चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार (fourth largest coal reserves globally) है. भारत में उच्चतम कोयला भंडार वाले शीर्ष तीन राज्य झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ हैं, जो देश के कुल कोयला भंडार के लगभग 70 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं.

Power Shortage: देश भर के प्रमुख संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति निम्न स्तर (critically low levels) पर है. यानी आने वाले महीनों में चीन (China) की ही तरह देश को बिजली की कमी (Power Shortage ) का सामना करना पड़ सकता है. सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, कोयले से चलने वाले बिजली संयंत्रों में 4 अक्टूबर को औसतन चार दिनों के लिए कोयले का भंडार था. यह सरकारी गाइडलाइन से बहुत कम है. सरकारी गाइडलाइन में कम से कम 2 सप्ताह की आपूर्ति की के लिए कहा गया है.

चीन के बाद भारत दुनिया में कोयले का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता (second largest producer and consumer of coal) है. भारत के बिजली उत्पादन (India’s electricity output) में कोयले (coal) की हिस्सेदारी 70% से अधिक है और लगभग तीन-चौथाई जीवाश्म ईंधन का घरेलू स्तर पर खनन किया जाता है.

CEA के डेटा के अनुसार, कुल पावर स्टेशनों में से 17 के पास शून्य मात्रा में स्टॉक था, जबकि उनमें से 21 के पास 1 दिन का स्टॉक था.
16 पावर स्टेशनों (power stations) के पास 2 दिन का कोल स्टॉक (coal stock) था और 18 के पास 3 दिन का कोयला स्टॉक बचा था. कुल 135 संयंत्रों (plants) में से 107 में 1 सप्ताह से अधिक समय तक स्टॉक नहीं था.

कोल और नेचुरल गैस की सप्लाई में भारी कमी

कोविड -19 महामारी की दूसरी लहर के जाने के बाद आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आई है और बिजली की मांग में भी महत्वपूर्ण उछाल देखा जा रहा है.
इससे कोयले (Coal) और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई में भारी कमी आई है. क्वार्ट्ज इंडिया ने कोल मार्केटिंग कंपनी इमान रिसोर्सेज के सीनियर ट्रेडर वासुदेव पमनानी के हवाले से लिखा, कोविड के बाद, किसी को भी उम्मीद नहीं थी कि अर्थव्यवस्था इतनी जल्दी यू-टर्न ले लेगी. लोगों को उम्मीद थी कि इकोनॉमी को रिकवर होने में 2-3 साल लगेंगे.

पावर जनरेशन फ्यूल की ग्लोबल डिमांड तेजी से बढ़ी

इकोनॉमी के खुलने के साथ ही पावर जनरेशन फ्यूल की ग्लोबल डिमांड तेजी से बढ़ी है. प्रमुख कोयला उत्पादक देश (major coal producing countries) मांग के अनुरूप सप्लाई बढ़ाने में विफल रहे हैं.
ऐसे में पावर जनरेशन फ्यूल कोल और नेचुरल गैस में ग्लोबल लेवल पर कीमतों में वृद्धि देखी जा रही है. हाल के दिनों में एशिया के कोल प्राइज बेंचमार्क रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए.
चीन के बिजली संकट से भी पावन जनरेशन फ्यूल की ग्लोबल डिमांड बढ़ी है. वैश्विक बाजारों में उच्च कीमतों के कारण भारत घरेलू बाजार की मांग को पूरा करने के लिए कोयले का आयात नहीं कर पा रहा है. भारत कोयले का दूसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है.

उच्चतम कोयला भंडार वाले शीर्ष तीन राज्य

भारत के पास विश्व स्तर पर चौथा सबसे बड़ा कोयला भंडार (fourth largest coal reserves globally) है. भारत में उच्चतम कोयला भंडार वाले शीर्ष तीन राज्य झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ हैं, जो देश के कुल कोयला भंडार के लगभग 70 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं.
कोयला मंत्रालय (ministry of coal) के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल कोयले का अधिकांश हिस्सा बिजली उत्पादन (electricity generation) के लिए खपत (consumed) होता है. भारत का 80% से अधिक कोयला उत्पादन कोल इंडिया करती है.

भारत समेत अन्य देश भी कर रहे संकट का सामना

आपूर्ति संकट (supply crunch) का सामना न केवल भारत बल्कि चीन और यूरोप को भी करना पड़ रहा है. वर्ल्ड लेवल पर कोयले का सबसे प्रमुख उपभोक्ता (consumer) चीन है जो कोयले और बिजली दोनों की भारी कमी का सामना कर रहा है.
अधिकांश क्षेत्रों में बिजली कटौती और ब्लैकआउट (Blackout) देखा गया. कई फैक्ट्रियों ने भी प्रोडक्शन अस्थायी रूप से बंद कर दिया.
नतीजतन, फरवरी 2020 के बाद पहली बार सितंबर में फैक्ट्री एक्टिविटी (Factory activity) अप्रत्याशित रूप से सिकुड़ गई. इसी तरह, यूरोपियन यूनियन में ऊर्जा की लागत आसमान को छू रही है.

क्या कर रही है भारत सरकार?

केंद्र ने कैप्टिव माइन्स से कोयले की 50 प्रतिशत बिक्री की अनुमति देने के लिए नियमों में संशोधन किया हैं. यह निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कैप्टिव माइन्स दोनों पर लागू होगा.
इस संशोधन के साथ, सरकार ने कैप्टिव कोल और लिग्नाइट ब्लॉकों की खनन क्षमताओं का अधिक उपयोग करके बाजार में अतिरिक्त कोयले को जारी करने का मार्ग प्रशस्त किया है. इससे बिजली संयंत्रों (power plants) पर दबाव कम होगा.

बड़े पैमाने पर बिजली कटौती नहीं हुई

भारत में अभी तक बड़े पैमाने पर बिजली कटौती नहीं हुई है. ग्रिड रेगुलेटर पावर सिस्टम ऑपरेशन कॉरपोरेशन (पीडीएफ) के आंकड़ों से पता चलता है कि कमी अब तक ज्यादातर उत्तरी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख तक ही सीमित रही है.
इमान रिसोर्सेज के सीनियर ट्रेडर वासुदेव पमनानी ने कहा, ‘मुझे लगता है, बिजली की राशनिंग (power rationing) अनौपचारिक रूप से शुरू हो चुकी है.
जो क्षेत्र आयातित कोयला बिजली उत्पादन संयंत्रों पर निर्भर हैं, उन्हें बिजली की कटौती का सामना करना पड़ेगा. टाटा पावर, अडानी पावर, जेएसडब्ल्यू और ऐसे अन्य बिजली स्टेशन उत्पादन में कटौती कर रहे हैं.’

इन राज्यों को बिजली कटौती का सामना नहीं करना पड़ेगा

पमनानी के अनुसार, कोयले के विशाल भंडार वाले भारतीय राज्य और भारत के वाणिज्यिक कोयला-खनन उद्योग – मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों को बिजली की कमी (power outages) का सामना नहीं करना पड़ सकता है.
भारत में ठंड में आवासीय बिजली की मांग भी कम हो जाती है. इसके विपरीत चीन में कड़ाके की ठंड में बिजली की मांग बढ़ जाती है. विश्लेषकों का मानना है कि अगले छह महीने भारत के बिजली उद्योग के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं.

क्या कहा पावर मिनिस्टर ने?

देश में कोयले की कमी (coal shortage) की खबरों को केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह (Union Power Minister RK Singh) ने खारिज किया. आरके सिंह कहा कि भारत में कोयला संकट चीन की तरह नहीं है.
भारत कोयले (Coal) की बढ़ती मांग को पूरा करने की स्थिति में है. सिंह ने कहा, ऊर्जा की मांग में तेज उछाल वास्तव में आर्थिक सुधार (economic recovery) का एक अच्छा संकेत (good sign) है.

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