16 रुपये के इस शेयर की असल कीमत है 1.7 लाख रुपये, दिलचस्प है वजह

एल्सिड इनवेस्टमेंट्स (Elcid Investments) की 2.9 लाख करोड़ की कीमत वाली एशियन पेंट्स में 2.95 फीसदी हिस्सेदारी है.

16 रुपये के इस शेयर की असल कीमत है 1.7 लाख रुपये, दिलचस्प है वजह
कचोलिया की तरह मुकुल अग्रवाल ने भी अपने पोर्टफोलियो में कुछ बदलाव किए हैं.

दलाल स्ट्रीट पर यह माइक्रोकैप स्टॉक 16 रुपये 20 पैसे में बिक रहा है. दिलचस्प बात यह है कि बाजार विशोषज्ञों का अनुमान है कि इसकी कीमत असल में 1 लाख 70 हजार रुपये से अधिक है. यानी, मौजूदा मार्केट वैल्यू से 10 हजार गुना ज्यादा. यह दलाल स्ट्रीट के उन चुनिंदा शेयरों में से एक है जो आमतौर पर अपर सर्किट में बने रहते हैं.

बात हो रही है एल्सिड इनवेस्टमेंट्स (Elcid Investments) के स्टॉक की, जिसकी सीमित ट्रेडिंग होती है और उसे आसानी से बेचा नहीं जा सकता. बीते 10 साल में कंपनी के शेयरों ने केवल 40 सत्रों के लिए कारोबार किया है. वजह यह कि इसे बेचने वाला है ही नहीं कोई मार्केट में. बाजार में 0.32 करोड़ रुपये की कीमत वाला यह स्टॉक आखिरी बार 27 जुलाई को ट्रेड किया गया है.

अनुमानित कीमत

दिल्ली के निवेशक आशीष चुघ ने Money9.com को बताया कि एल्सिड इनवेस्टमेंट्स (Elcid Investments) की 2.9 लाख करोड़ की कीमत वाली एशियन पेंट्स में 2.95 फीसदी हिस्सेदारी है. पेंट कंपनी के 2.83 करोड़ शेयर इसके पास हैं. 3,000 रुपये की मौजूदा मार्केट प्राइस के लिहाज से एशियन पेंट्स में एल्सिड इनवेस्टमेंट्स (Elcid Investments) का निवेश 8,500  करोड़ रुपये के लगभग है. यह एशियन पेंट्स के प्रमोटरों में से एक है.

एल्सिड के दो लाख शेयरों के इक्विटी बेस को ध्यान में रखते हुए, चुघ का अनुमान है कि कंपनी के एक शेयर की कीमत है 4.25 लाख रुपये. होल्डिंग कंपनियां चूंकि आमतौर पर डिस्काउंट रेट पर कारोबार करती हैं, तो 60 फीसदी की छूट के हिसाब से इसके एक शेयर की कीमत होनी चाहिए 1.70 लाख रुपये.

कोलकाता के निवेशक अरुण मुखर्जी का भी अनुमान है कि एल्सिड इनवेस्टमेंट्स (Elcid Investments) का उचित मूल्य करीब 3-4 लाख रुपये हो सकता है.

शेयरहोल्डिंग पैटर्न

एल्सिड के प्रमोटर अमर अरविंद वकील, दीपिका अमर वकील, वरुण अमर वकील और अमृता अमर वकील की कंपनी में करीब 74.98 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. 2013 में प्रमोटरों ने 11,455 रुपये प्रति शेयर पर डीलिस्टिंग का प्रस्ताव रखा था. मगर शेयरधारकों ने उसे अस्वीकार दिया. उस वक्त शेयर की असल कीमत डीलिस्टिंग प्राइस की 10 गुना थी.

कीमत बढ़ाने का जरिया

मुखर्जी का कहना है कि इस तरह के मामलों में स्टॉक एक्सचेंजों को एक दिन या हफ्तेभर के लिए सर्किट की पाबंदी को हटाते हुए ट्रेड करने का मौका देना चाहिए. वहीं, चुघ का कहना है कि स्टॉक को उचित कीमत तक लाने के लिए एक्सचेंजों को जरूरी कदम उठाने होंगे. ऐसा नहीं किया तो यह मौजूदा रेट पर हमेशा के लिए अटका रहेगा.

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