FPI के विरोध के बावजूद T+1 सेटलमेंट योजना से पीछे नहीं हटेगा सेबी

सेबी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि एफपीआई के लिए यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि भारत में उनके सभी मौजूदा डेरिवेटिव ट्रेड प्रीफंडेड हैं.

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  • Updated On - September 11, 2021 / 10:32 AM IST
FPI के विरोध के बावजूद T+1 सेटलमेंट योजना से पीछे नहीं हटेगा सेबी
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सिक्युरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (Sebi) अगले साल से शुरू होने वाले अपने T + 1 ( ट्रेड+1 दिन) सेटलमेंट प्लान को लागू करने से पीछे नहीं हटेगा. सेबी ने पिछले मंगलवार को इस नए प्लान की घोषणा की थी. इस प्लान को जनवरी 2022 से शुरू होना है. सेबी के एलान के बाद विदेशी निवेशकों ने इस फैसले का विरोध किया. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट्स के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सेबी के इस फैसले के खिलाफ वित्त मंत्री से मुलाकात करेंगे.

T+1 सेटलमेंट प्लान के खिलाफ एफपीआई

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) सेबी द्वारा इक्विटी ट्रेडों में सेटलमेंट समय को T+1 (ट्रेड +1 दिन), जो वर्तमान में T+2 है, के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं. एफपीआई का कहना है कि नया सेटलमेंट साइकल अनिवार्य रूप से उन्हें अपने ट्रेडों को ‘प्रीफंड’ करने के लिए मजबूर करेगा, यानी शेयरों की डिलीवरी मिलने से पहले ही उनका भुगतान कर देगा. एफपीआई का मानना है कि इससे कारोबारी लागत बढ़ेगी. बाजार रेगुलेटर्स इस कदम को घरेलू निवेशकों के लिए लाभ के रूप में देख रहे हैं, जबकि विदेशी फंडों को केवल अपने सिस्टम को बदलाव की जरूरत है, क्योंकि वे पहले से ही डेरिवेटिव में एक स्मॉल सेल्टमेंट साइकल का पालन कर रहे हैं.

एफपीआई के डेरिवेटिव ट्रेड प्रीफंडेड हैं

सेबी के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि एफपीआई के लिए यह कोई नई बात नहीं है, क्योंकि भारत में उनके सभी मौजूदा डेरिवेटिव ट्रेड प्रीफंडेड हैं. इसके अलावा, आरंभिक सार्वजनिक पेशकशों में सभी बोलियां, जहां एफपीआई बड़े भागीदार हैं, वास्तविक आवंटन से नौ दिन पहले ही तय किये जाते हैं. अधिकारी ने बीएसई के उदाहरण का हवाला देते हुए कहा कि एफपीआई ब्लॉक ट्रेडों को छोड़कर, कुल ट्रेडिंग वॉल्यूम में केवल 5 फीसद का योगदान करते हैं. सेबी के सीनियर अधिकारी के मुताबिक खुदरा निवेशकों सहित घरेलू निवेशक, जिनका बीएसई में लगभग 95 फीसद नकद बाजार की मात्रा है, छोटे सेटलमेंट साइकल से लाभान्वित होंगे.

बाजार तय करेगा कि क्या फायदेमंद है और क्या नहीं

सेबी के मुताबिक बाजार खुद फैसला करेगा कि क्या फायदेमंद है और क्या नहीं. यदि वास्तव में T+1 सेटलमेंट निवेशकों के लिए हानिकारक है तो T+1 साइकल में बदलाव किया जाएगा. यदि बाजार को लगता है कि T+1 अधिक प्रभावी है, तो एफपीआई सहित सभी निवेशक छोटे सेटलमेंट साइकल को अपनाएंगे. सेबी ने मंगलवार को एक सर्कुलर जारी कर स्टॉक एक्सचेंजों को अगले साल 1 जनवरी से स्मॉल टी+1 सेटलमेंट के तहत चुनिंदा शेयरों की पेशकश करने की अनुमति दी है. वर्तमान में, आज होने वाला कोई भी नकद बाजार व्यापार परसों यानी निवेशक को दो दिनों के बाद उसके खाते में शेयर प्राप्त होता है. टी+1 के तहत निवेशकों को अगले दिन उनके डीमैट खातों में शेयर मिल जाएंगे.

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