खराब कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए जीरो टॉलरेंस 

टर्टल स्टार पोर्टफोलियो मैनेजर्स के को-फाउंडर सुनील शाह ने अपनी इन्वेस्टमेंट फिलॉसफी के बारे में बताया.

खराब कॉरपोरेट गवर्नेंस के लिए जीरो टॉलरेंस 

zero tolerance: सुनील शाह ने  90 के दशक में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. यह वो समय था जब बैलेंस पेमेंट क्राइसिस को देखते हुए, नरसिम्हा राव सरकार ने विकास और निवेश को बढ़ावा देने के लिए अर्थव्यवस्था को उदार बनाया. पूरे देश में आंत्रप्रेन्योरशिप और निवेश की इस नई दौड़ में, शाह ने एक रिसर्च एनालिस्ट के रूप में अपना करियर शुरू किया, एक ऐसा प्रोफेशन जो अभी नया था. लेकिन इस तरह टर्टल स्टार पोर्टफोलियो मैनेजर्स के को-फाउंडर शाह ने शेयर मार्केट में कदम रखा.

उन्होंने शेयर मार्केट को समझने के लिए पढ़ना शुरू किया. “द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर” और “द सिक्योरिटी एनालिसिस” जैसी किताबों ने उनके इस मिशन में उनकी मदद की. मनी9 ने शाह की इन्वेस्टमेंट फिलॉसफी समझने के लिए उनसे बात की

Q: जब स्टॉक पिक करने की बात आती है तो आपकी  इन्वेस्टमेंट फिलॉसफी क्या कहती है?

शाह: मुख्य फोकस इस बात पर रखना है कि कंपनी का बिजनेस कितना बढ़ेगा और कंपनी कैसे इस ग्रोथ को सुनिश्चित करेगी. ये स्टेटमेंट आसान दिखता है लेकिन निवेश से पहले विचार करने के लिए सभी जरूरी पहलुओं को इसमें शामिल करता है. जैसा कि हम जानते हैं कि जापानी लोग अपना 70% समय प्लानिंग में और केवल 30% एग्जिक्यूशन में लगाते हैं. मेरा मानना है कि 98% समय प्लानिंग करने में और बाकी को अमल में लाने और स्टॉक रखने में लगाना चाहिए.

मैं एक उदाहरण देता हूं. 50 स्टूडेंट्स की एक क्लास में, टॉप 5 स्टूडेंट्स को सब जानते हैं. मैं उन स्टूडेंट्स पर फोकस करने की कोशिश करूंगा जिनकी रैंक 10 से 20 के बीच है और वो स्टूडेंट क्या अलग-अलग चीजें कर रहे हैं ताकि उनमें से कोई भी टॉप 5 रैंक के स्टूडेंट्स के करीब पहुंच सके.

अब स्टूडेंट्स को कंपनियों से बदल दें. इन्वेस्टमेंट फिलोसफी क्वालिटी वाली मिड-कैप कंपनियों को चुनना है जो कल की लार्ज-कैप कंपनियां हो सकती हैं.

Q: जब इन्वेस्टमेंट अपॉर्चुनिटी को एनालाइज करने की बात आती है, तो आप किस बात को ज्यादा महत्व देते हैं – कनविक्शन या एनालिसिस?

शाह: शेयर बाजार विज्ञान से ज्यादा कला है. विज्ञान में 1 + 1 = 2 और कुछ नहीं लेकिन शेयर मार्केट में ऐसा कभी नहीं होता है. इसे इस तरह समझें, एक आदमी जो जॉगिंग ट्रैक का चक्कर लगा रहा है, वो लगभग एक निर्धारित समय में चक्कर पूरा करेगा, लेकिन एक कुत्ता अपना समय लेगा, कुत्ता पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण की ओर जाएगा, रुकेगा, दौड़ेगा, भौंकेगा, कूदेगा. तो फंडामेंटल या एनालिसिस आदमी की तरह है, लेकिन मार्केट या शेयर की कीमतें कुत्ते की तरह हैं. इसलिए एनालाइज करने के बाद – किसी चीज को होल्ड करने के लिए कनविक्शन ज्यादा महत्वपूर्ण है – यह केवल कनविक्शन है कि कुत्ता अपने डेस्टिनेशन तक पहुंच जाएगा लेकिन समय की भविष्यवाणी करना मुश्किल है – वैसे ही आगे के रास्ते को एनालाइज किया जा सकता है लेकिन लंबे समय तक होल्ड करने के लिए कनविक्शन की जरूरत होती है.

Q: मल्टीबैगर में तब्दील हो चुके शेयरों में बने रहने का कॉन्फिडेंस आपमें कहां से आता है?

शाह: मेरे पास एक दशक से अधिक समय से कुछ स्टॉक हैं जो 100 बैगर बन चुके हैं. उन्हें होल्ड करने का कॉन्फिडेंस इसलिए है क्योंकि मेरा फोकस हमेशा बिजनेस रहा है रिटर्न की प्राइज नहीं. क्योंकि मेरा एनालिसिस मुझे बताता है कि बिजनेस बढ़ने वाला है और कंपनी अपनी मार्केट शेयर को बनाए रखने या बढ़ाने के लिए सभी सही चीजें कर रही है, इसलिए मैं इन कंपनियों को जारी रखूंगा, और स्टॉक की कीमत पर फोकस नहीं करूंगा. होल्ड करने का ये कनविक्शन ही रिटर्न जनरेट   करता है और कनविक्शन बिजनेस के पिलर्स पर है न कि स्टॉक प्राइस पर.

Q: आप कहां फेल हुए और क्यों? क्या आप कुछ ऐसे शेयरों के नाम बता सकते हैं जिन्होंने आपके एसेट को कम किया? क्या आप अभी भी उन्हें होल्ड कर रहे हैं? इन गलतियों से क्या सबक मिले?

शाह: शेयर मार्केट एक दिलचस्प जगह है. जिस दिन आप यह मानने लगेंगे कि आपने खेल के सभी नियमों में महारत हासिल कर ली है, खेल बदल जाता है. जिस दिन आप अपनी सफलता को लेकर एरोगेंट होने लगते हैं, उसी दिन शेयर बाजार आपके चेहरे पर जोरदार थप्पड़ मारता है.

मैंने अपने इन्वेस्टिंग करियर में अपनी गलतियों का शेयर बनाया है, लेकिन सबसे कॉमन एलिमेंट मैनेजमेंट फेस वैल्यू पर लेना और इमोशनल होकर उनके स्टेटमेंट पर भरोसा करना है. कॉरपोरेट गवर्नेंस को ठीक से ना समझ पाना इन्वेस्टमेंट जर्नी में मेरी सबसे बड़ी कमी रही है.

स्टॉक आयडिया में से एक जिसने मुझे सबक सिखाया है, वो है RICOH इंडिया. इससे काफी कुछ सीखने को मिला . मैंने बस समय से एग्जिट करके खुद को बचाया. मैंने कंपनी से इमोशनली जुड़ने के बजाय डर के चलते उसे बेचा. मैनेजमेंट की बातें, अपॉरच्युनिटी का साइज स्ट्रॉन्ग ग्लोबल पेरेंट की बैकिंग, सरकारी आदेशों की घोषणा, ग्रोथ के लिए लोन देने के लिए प्रमोटर की भागीदारी, एग्जीबीशन में प्रोडक्ट विजिबिलिटी, विभिन्न फ्रेंचाइजी के साथ कई शहरों में बातचीत के जरिए ग्राउंड चेक सभी गलत साबित हुए.

अंत में, सीख यह थी कि सभी चेक और बैलेंस के बावजूद, आप गलत हो सकते हैं. बैड लक के खिलाफ कुछ भी काम नहीं करता. सबसे बड़ी सीख यह रही है कि कॉरपोरेट गवर्नेंस पर जरा सी भी शंका होने पर  मामले को गंभीरता से लें और हो सके तो एग्जिट कर लें.

Q: आपका निवेश गुरु कौन है और आप अभी कौन सी किताबें पढ़ रहे हैं?

शाह: मैं पहले इनाम सिक्योरिटीज डायरेक्ट के लिए रिसर्च हेड रहा हूं. शेयर मार्केट के दीवानों के लिए इनाम ज्ञान का मंदिर था. मेरे गुरु मनीष चोखानी, नीलेश शाह, विनोद ओहरी, दिव्येश शाह रहे हैं. मेरे कई दोस्त हैं जिनसे मैं सीखता रहता हूं.
हर किसी से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है, हमारा एटीट्यूड ही है जो हमें बढ़ने में मदद करता है या हमें रोके रखता है. मैंने अभी-अभी जो किताबें कंप्लीट की हैं, वो हैं “साइकोलॉजी ऑफ मनी”, “जॉय ऑफ कंपाउंडिंग” और अगली किताब विशाल खंडेलवाल की “स्केचबुक ऑफ विजडम” होगी.

Q: आपका टिपीकल वर्क डे कैसा होता है और आपके शौक क्या हैं?

शाह: “साइकोलॉजी ऑफ मनी” किताब से संकेत लेते हुए – आप जो चाहते हैं, जब आप चाहते हैं, जिसके साथ चाहते हैं, जब तक आप चाहते हैं, तब तक करने की क्षमता अमूल्य है. यह सबसे ज्यादा डिविडेंड मनी है.
मेरा एक टिपीकल वर्क डे दूसरों से अलग नहीं होता है. इसे आसान बनाना मुश्किल होता है. अब हम एक ऐसी दुनिया में हैं जहां आंकड़ों की भरमार है और पढ़ने, विचारों पर नोट्स बनाने और एक जैसी सोच रखने वालों के साथ किसी नजरिए पर चर्चा में बहुत समय लगाना पड़ता है. दिन का खास उद्देश्य शोर से दूर रहना और मार्केट की आवाज़ पर फोकस करना है.

Q: आप मौजूदा स्तरों पर किन सेक्टरों में मोलभाव कर रहे हैं?

शाह: मेरे हिसाब से कोविड टाइम में तीन थीम विकसित हुई हैं – पहला, हमारे जीवन में IT को अपनाना; दूसरा, सेविंग का फाइनेंशियलाइजेशन और तीसरा, PLI या इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों की डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग.
मुझे लगता है कि इन तीनों थीम्स में कुछ सालों में विकास की संभावना है.

Q: आपके एक्सपीरियंस के आधार पर एक इंडीविजुअल इन्वेस्टर को आपकी टॉप तीन सलाह क्या होगी?

शाह: रोम एक दिन में नहीं बना. वेल्थ क्रिएशन में लंबा वक्त लगता है. शॉर्ट टर्म ग्रोथ के बजाए आप जितने समय तक होल्ड करते है उतना ज्यादा पैसा बनता है. कंपाउंडिंग फॉर्मूला में “N” “R” की तुलना में ज्यादा महत्वपूर्ण है.

शेयर मार्केट पैसा बनाने की जगह है. स्टॉक खरीदते समय आप उसकी कीमतों की बजाय उसके बिजनेस पर ध्यान दें.
इसके अलावा अगले 10-20 सालों के लिए इंडेक्स फंड में SIP करें.

Q: एक इंडीविजुअल के रूप में आप डायरेक्ट स्टॉक या म्यूचुअल फंड क्या पसंद करेंगे और जीवन में आपका सबसे बड़ा निवेश क्या है?

शाह: अगर आप सीधे स्टॉक में हैं तो निवेश एक फुल टाइम जॉब है. मुझे यह काम पसंद आ रहा है और इसलिए, मुझे ये रास्ता पसंद है. हालांकि, अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे बिजनेस या प्रोफेशन में है, तो म्यूचुअल फंड में SIP सबसे अच्छा तरीका है.
जीवन में मेरा सबसे बड़ा निवेश भाग्य पर आधारित है. मैं भाग्यशाली हूं कि 1993 से शेयर मार्केट की जर्नी का हिस्सा बना. मैंने किताबों से सबक भी लिए और उन पर चला भी. उन प्रोसेस को फोलो करना ही मेरा सबसे बड़ा निवेश रहा है और 100 बैगर्स पर होल्डिंग एक डेरिवेटिव रहा है. एस्ट्रल, बालकृष्ण इंडस्ट्रीज, मुथूट फाइनेंस, मिंडा इंडस्ट्रीज, CDSL, अतुल, CAMS और अन्य ने मेरे लिए अच्छा काम किया है.

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