कोर और सेटेलाइट म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो: स्थिरता के साथ मिलेगा बढ़िया रिटर्न

Portfolio: कोर पोर्टफोलियो लॉन्ग टर्म के लिए स्थिरता जबकि सेटेलाइट पोर्टफोलियो अतिरिक्त रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न प्रदान करता है.

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निवेशकों को एक मैनेजमेंट शैली का चयन करना चाहिए जो पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का अधिकतम लाभ उठाने के लिए उनके निवेश पैटर्न से मेल खाता हो

निवेशकों को एक मैनेजमेंट शैली का चयन करना चाहिए जो पोर्टफोलियो मैनेजमेंट का अधिकतम लाभ उठाने के लिए उनके निवेश पैटर्न से मेल खाता हो

Portfolio: निवेशक हमेशा बेहतर रिटर्न, बेहतर प्रोडक्ट्स, बेहतर कॉरपोरेट गवर्नेंस की तलाश में रहते हैं. ऐसे ही एक पोर्टफोलियो (Portfolio) मॉडल के तहत वेल्थ मैनेजर इन दिनों म्यूचुअल फंड ग्राहकों को प्रस्तावित कर रहे हैं, जो है कोर-एंड-सेटेलाइट निवेश.

कम लागत वाला पैसिव फंड

इसमें पोर्टफोलियो की प्राइमरी एसेट्स के रूप में कम लागत वाला पैसिव फंड है. जैसा कि नाम से पता चलता है, ये एक कोर पोर्टफोलियो है, जो कम जोखिम के साथ ज्यादा रिटर्न देने के लिए एक इन्‍वेस्टमेंट पोर्टफोलियो का सेंटर है.

दूसरी ओर, एक सेटेलाइट पोर्टफोलियो सक्रिय रूप से विषयगत कैटेगरी, मीडियम और स्मॉल-कैप फंड का मकसद आपके पोर्टफोलियो में बढ़िया रिटर्न देने का है.

पोर्टफोलियो कैसे काम करता है?

इस रणनीति के साथ निवेशक अपने पोर्टफोलियो को दो सेगमेंट में बांट लेते हैं. कोर और सेटेलाइट. कोर पोर्टफोलियो जहां स्थिरता प्रदान करता है. वहीं, सेटेलाइट का मकसद रिस्क के साथ बढ़िया रिटर्न देने का है.

ये निवेश पर मिलने वाले कुल रिटर्न को बूस्ट करता है. कोर पोर्टफोलियो का निर्माण लॉन्ग टर्म उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए किया गया है. इसकी अकाउंट में हिस्सेदारी 60 से 70 फीसदी होती है.

इस पोर्टफोलियो में इंडेक्स, विविधता, इक्विटी और लार्ज-कैप इक्विटी जैसे फंड शामिल होते हैं. सेटेलाइट पोर्टफोलियो आपके शेयर पोर्टफोलियो का एक छोटा हिस्सा होता है.

इसे आर्थिक और बाजार स्थितियों को देखते हुए भुनाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के लिए इसमें लंबी अवधि के गिल्ट फंड और सेक्टर-विशिष्ट फंड शामिल हैं.

इस तरह के पोर्टफोलियो से क्या फायदे हैं?

ऐसे पोर्टफोलियो को बनाने के पीछे की मुख्य रणनीतिक फायदा है कि यह निवेश खर्च को कम कर देता है. जब खर्च का स्तर बढ़ जाता है, तो रिटर्न पर नकारात्मक असर पड़ता है.

जबकि खर्च अनुपात में छोटे और महत्वहीन दिखाई दे सकते हैं, लेकिन वे समय के साथ एक महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं. इंडेक्स फंडों का खर्च अनुपात सबसे कम होता है.

इससे निवेशक को लॉन्ग टर्म में लाभ होता है. दूसरी ओर, सेटेलाइट बाजार के बदलते हालातों के जवाब में निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को दोबारा बैलेंस करने में समर्थ बनाता है.

सेटेलाइट की रणनीति में सक्रिय मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी शामिल हैं, जो अलग-अलग घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया करने की संभावनाएं पैदा करती हैं और पोर्टफोलियो को लाभ या खुद को बचाने के लिए काम आ सकती हैं.

अक्सर, सेटेलाइट पोर्टफोलियो मुख्य पोर्टफोलियो के रिस्क प्रोफाइल को प्रभावित किए बिना औसत से अधिक रिटर्न देते हैं.

Published - July 15, 2021, 12:05 IST