अब कम कर्मचारी वाली छोटी कंपनियों को मिलेगा बढ़िया इंश्योरेंस कवर

इंश्योरेंस कवर नहीं है. कोविड की महामारी हमारे लिए बेहतर मौके लेकर आई है, यह कहावत बीमा क्षेत्र में लागू होती दिख रही है.

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सही इंश्‍योरेंस लेने के लिए जरूरी है कि आप पहले अपनी महत्‍वाकांक्षाओं और जरूरतों को ध्‍यान में रखें. इसी के आधार पर अपना लक्ष्‍य निर्धारित करें

सही इंश्‍योरेंस लेने के लिए जरूरी है कि आप पहले अपनी महत्‍वाकांक्षाओं और जरूरतों को ध्‍यान में रखें. इसी के आधार पर अपना लक्ष्‍य निर्धारित करें

एक नौकरीपेशा के तौर व्यक्ति अपनी कंपनी से परिवार के लिए बेहतर इंश्योरेंस कवर (Insurance Cover) की उम्मीद करता है, और अब ये आसान भी हो गया है क्योंकि बाजार में कई बेहतर विकल्प मौजूद हैं. टेक-इंश्योरर्स की एंट्री से ग्रुप इंश्योरेंस के मार्केट में हलचल मच गई है. ये एक अच्छी खबर है खासकर, उन लोगों के लिए जिनके पास अपना अलग से इंश्योरेंस कवर (Insurance Cover) नहीं है. कोविड की महामारी हमारे लिए बेहतर मौके लेकर आई है, यह कहावत बीमा क्षेत्र में लागू होती दिख रही है.

समूह बीमा क्षेत्र में छोटी फर्मों की जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए टेक-इंश्योरर्स स्टार्टअप ने कदम बढ़ाया है. ऐसी न जाने कितनी फर्म हैं जिनमें 10 से 20 कर्मचारी ही काम करते हैं. ये कंपनी ग्रुप इंश्योरेंस चाहती हैं लेकिन ज्यादा आकर्षक प्रोडक्ट न होने के कारण खरीदने में असमर्थ रहती हैं. नए जमाने की बीमा कंपनियों की शुरुआत एक आदर्श बदलाव लाने का वादा करती हैं.

इंश्योर-टेक प्लम के को-फाउंडर सौरभ अरोड़ा ने बताया कि “बाजार में मौजूद निजी कंपनियां जो इंश्योरेंस कवर ऑफर करती हैं उनमें आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, बजाज आलियांज, केयर हेल्थ इंश्योरेंस और डिजिट इंश्योरेंस जैसे नाम मौजूद हैं. बड़ी सरकारी कंपनियां जैसे न्यू इंडिया एश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस जैसे नाम भी बाजार में मौजूद हैं. जबकि स्थापित कंपनियां बड़े कॉरपोरेशन और उनको सुविधाएं दे रही हैं, जिनके पास हजारों कमर्चारी हैं.”

टेक्नोलॉजी बनी केंद्र बिंदू

प्लम के मुताबिक उन्होंने इंश्योरेंस कंपनियां जैसे आईसीआईसीआई लोम्बार्ड, केयर हेल्थ, स्टार हेल्थ और न्यू इंडिया एश्योरेंस जैसी कंपनियों के साथ हाथ मिलाया है और उन फर्म को ग्रुप इंश्योरेंस प्रदान करवा रहे हैं जिनमें कर्मचारियों की संख्या 5 से लेकर 10 तक है. ये अवसर दूसरी कंपनियों के लिए भी खुले हैं.

इंश्योरेंस एग्रीगेटर पॉलिसी बाजार बीते सप्ताह SMEs, MSMEs और बड़ी कॉरपोरेट कंपनियों के लिए कर्मचारियों की संख्या, लोकेशन और कंपनी के आकार के आधार पर कस्टमाइज्ड प्लान लेकर बाजार में उतरा है.

पॉलिसी बाजार के मुताबिक “कॉरपोरेट कंपनियां हमारे पोर्टल पर विजिट कर सकती हैं, वहां उन्हें अलग अलग इंश्योरेंस कंपनियों के क्वोट्स मिलेंगे. वो अपनी जरूरत के हिसाब से प्लान में बदलाव करा सकती हैं. उदाहरण के तौर पर अगर कंपनी के कर्मचारी युवा हैं तो उनके लिए पॉलिसी वरिष्ठ नागरिकों से अलग हो सकती है. साथ ही अगर वो अपनी पॉलिसी में माता-पिता को शामिल कराना चाहते हैं तो ऐसा भी संभव है.”

पॉलिसी बाजार ये भी कहता है कि “इससे न सिर्फ पॉलिसी की प्रक्रिया आसान हो जाती है बल्कि कर्मचारियों को भी अलग-अलग च्वाइस मिलती है. एग्रीगेटर बताता है कि ऑनलाइन बीमा कंपनी का दावा है कि यह नियोक्ता की तुलना में कर्मचारी पर ज्यादा केंद्रित है.”

कॉरपोरेट इंश्योरेंस के बिजनेस हेड रघुवीर मलिक के मुताबिक “एक बार जब कंपनियां हमारे साथ जुड़ती हैं तो हम उनके कर्मचारियों की जरूरत के हिसाब से HR को मेल भेजते हैं. हम उनसे अपनी ऐप को डाउनलोड करने के लिए कहते हैं, ताकि वो पॉलिसी के फीचर और फायदे को जान सकें. हम कंपनियों को डायग्नोस्टिक्स जैसी 27 गैर-अस्पताल में भर्ती सुविधाओं के साथ एक हेल्थ को फोकस्ड करते हुए इंश्योरेंस प्रोडक्ट दे रहे हैं. ”

मलिक ने आगे कहा कि “इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है. ये फीचर्स पहले से ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी में मौजूद हैं. लेकिन 10 में से 8 कर्मचारी इन फीचर्स के बारे में नहीं जानते हैं. इसका अंतर सुविधाओं की डिलीवर में निहित है.”

क्या हैं चुनौतियां?

इन सब बातों को लेकर लेकिन एक चुनौती भी है. कर्मचारियों में जागरूकता बढ़ाते हुए और बीमारियों को इंश्योरेंस में कवर करना एक बड़ी चुनौती भी है. स्थापित खिलाड़ियों ने इसे अनुभव के साथ सीखा है. लेकिन प्रतिस्पर्धी माहौल के बीच कर्मचारी को बेहतर रिटर्न मिलना चाहिए.

नए इनोवेशन करते हुए, प्लम ने कहा कि ग्रुप इंश्योरेंस से फायदा उठाने के लिए 5 साल की छोटी कंपनियों को सक्षम करने के लिए नई अंडरराइटिंग और धोखाधड़ी का पता लगाने वाले एल्गोरिदम तैयार किए हैं यह प्लेटफॉर्म रीयल-टाइम बीमा डिजाइन और कीमत निर्धारण को सक्षम बनाता है ताकि कंपनियां 3-क्लिक में बीमा खरीद सकें. साथ ही, एक इंटेग्रेटेड डिजिटल प्रक्रिया के जरिए कर्मचारियों को टेंशन फ्री दावों का अनुभव मिल सके.

इंश्योर-टेक कंपनियों के प्रयास बेहद सराहनीय हैं, लेकिन असली चुनौती पॉलिसी को इशु नहीं रिन्यू करना है. फाइनेंशियल राजन बेदी के मुताबिक “यदि ग्रुप पॉलिसी में पॉलिसीहोल्डर्स के गलत सलेक्शन के कारण बीमा कराने वालों को क्लेम के समय खराब अनुभव का सामना करना पड़ सकता है, इसका नुकसान तब होगा जब अगले साल ज्यादा प्रीमियम भरना पड़ेगा. एक नया बीमाकर्ता अभी सस्ते प्रीमियम पर पॉलिसी दे सकता है क्योंकि उन्होंने नुकसान नहीं उठाया है, लेकिन साल-दर-साल पॉलिसीहोल्डर बदलना कठिन प्रक्रिया होगी.”

Published - July 20, 2021, 12:38 IST