एजुकेशन लोन के ब्याज पर छूट तभी मिलेगी जब ये लोन खुद के लिए, बच्चों के लिए या पति-पत्नी की हायर एजुकेशन के लिए लिया जाए. भारत या विदेश में कहीं भी पढ़ाई के लिए ये लोन लिया जा सकता है.
एजुकेशन लोन के भुगतान में चूक करने से छात्र के साथ को-एप्लीकेंट की मुश्किलें बढ़ जाती हैं. इससे क्रेडिट स्कोर खराब हो जाता है क्योंकि को-एप्लीकेंट ही इस लोन के गारंटर हैं.
एजुकेशन लोन छात्र के नाम पर होता है लेकिन उसमें गारंटर की जरूरत पड़ती है जो आमतौर पर छात्र के माता-पिता होते हैं. यह लोन बिना जमानत यानी बिना किसी सिक्योरिटी के दिया जाता है.
कर्जदार की ओर से वसूली का दबाव, भागता ब्याज, ऊपर से लेट फीस. इससे दबाव में आकर व्यक्ति एक लोन से छुटकारा पाने के लिए दूसरा और फिर तीसरा लोन ले बैठते हैं. इस तरह वह महंगे लोन के जाल में फंस जाता है.