यदि वसीयत पंजीकृत नहीं है तो इसकी वैधता या वास्तविकता साबित करना मुश्किल होगा. एक पंजीकृत वसीयत के साथ न तो छेड़छाड़ की जा सकती है न ही इसे चुराया जा सकता है.
अगर किसी खाते में जमा राशि शून्य हो जाती है तो उसे बंद कर देना चाहिए. लेकिन कमाई के चक्कर में बैंक नैतिकता को ताक पर रखकर लोगों की जेब ढीली कर रहे हैं.