ग्रीन एनर्जी के दावे किस काम के? 7 साल में 38% बढ़ेगी कोयले की खपत

G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और ग्रीन एनर्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की बात हुई है.

ग्रीन एनर्जी के दावे किस काम के? 7 साल में 38% बढ़ेगी कोयले की खपत

देश में एक तरफ ग्रीन एनर्जी के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं और दूसरी तरफ हकीकत देखें तो देश में बिजली के लिए कोयले पर निर्भरता लगातार बढ़ रही है और आगे इसमें और बढ़ोतरी की संभावना है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने हाल में कहा है कि देश में फिलहाल जो 49 गीगावॉट की नई कोल पावर क्षमता तैयार हो रही है, उसमें 2030 तक 25-30 गीगावॉट की नई क्षमता जुड़ेगी. यानी कोयले से ज्यादा बिजली उत्पादन के लिए ज्यादा कोयले की खपत करनी होगी.

फिलहाल देश में करीब 212 गीगावॉट बिजली कोयले से तैयार होती है जिसमें 77.7 करोड़ टन कोयले की खपत होती है, अतीरिक्त 49 गीगावॉट बिजली के लिए जो नए पावर प्लांट तैयार हो रहे हैं उनमें करीब 18.1 करोड़ टन कोयले की खपत होगी और जो प्रस्तावित 25-30 गीगावॉट क्षमता है, उसमें भी 11.1 करोड़ टन कोयले की खपत होगी. यानी 2030 तक 292 गीगावॉट बिजली तैयार करने के लिए कोयले की कुल खपत बढ़कर 106.9 करोड़ टन हो जाएगी, जो मौजूदा खपत से 38 फीसद अधिक होगी.

कोयले से बिजली उत्पादन बढ़ाने को लेकर केंद्रीय ऊर्जा मंत्री का बयान ऐसे समय पर आया है जब 10 दिन पहले भारत की अध्यक्षता में दिल्ली में हुए G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान कोयले जैसे जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करने और ग्रीन एनर्जी उत्पादन को बढ़ावा देने की बात हुई है.

हालांकि एक तथ्य यह भी है कि दुनियाभर में कोयले से बिजली उत्पादन के मामले में भारत दुनिया के कई देशों से पीछे है और बिजली खपत के मामले में भी पीछे है. पर्यावरण में बदलाव को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने जो अलग अलग देशों के लिए उर्जा खपत में बदलाव को लेकर जो लक्ष्य निर्धारित किए हैं, उन्हें पूरा करने के मामले में भी भारत कई विकसित देशों से आगे है.

Published - September 19, 2023, 12:13 IST