एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस ने डेलॉइट के साथ मिलकर भारतीय उपभोक्ताओं की वित्तीय तैयारियों को लेकर एक स्टडी की है. अध्ययन में इस बात का पता चला है कि बीमा नहीं लेने वाले 71 फीसद लोग वित्तीय सुरक्षा के लिए बीमा को जरूरी मानते हैं. दूसरी ओर 83 फीसद बीमित व्यक्ति वित्तीय सुरक्षा को पाने के लिए बीमा की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हैं. अध्ययन के मुताबिक 68 फीसद लोग मानते हैं कि उनके पास पर्याप्त बीमा है. हालांकि इन सभी आंकड़ों के बीच सिर्फ 6 फीसद लोग ऐसे हैं जिनके पास वित्तीय सुरक्षा के लिए पर्याप्त बीमा कवरेज है.
5 साल में 47 फीसद ने जीवन बीमा पॉलिसी सरेंडर की “उपभोक्ता के भ्रम को दूर करना” शीर्षक वाले वित्तीय प्रतिरक्षा अध्ययन 3.0 में भारत के 41 शहरों में 5,000 लोगों के बीच सर्वे किया गया. अध्ययन में एक चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि बीते 5 साल में इंश्योरेंस लिए हुए 47 फीसद लोगों ने अपनी जीवन बीमा पॉलिसी सरेंडर कर दी है. एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस के एमडी एवं सीईओ महेश कुमार शर्मा ने वित्तीय तैयारियों को समझने के तरीके में एक आदर्श बदलाव की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है.
94 फीसद के पास अपर्याप्त बीमा कवर उन्होंने कहा कि यह एक चिंता की बात है कि 80 फीसद उपभोक्ता वित्तीय सुरक्षा में बीमा की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हैं और उसके बावजूद 94 फीसद के पास अपर्याप्त बीमा कवर है. महेश कुमार शर्मा का कहना है कि यह अध्ययन सिर्फ एक रिपोर्ट से कहीं ज्यादा है और इसके लिए काम किए जाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि हर एक व्यक्ति जीवन के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए अवसर पाने का हकदार है. उन्होंने धारणा और वास्तविकता के बीच स्पष्ट अंतर पर जोर दिया और सच्ची ‘वित्तीय प्रतिरक्षा’ हासिल करने के लिए व्यक्तियों को सशक्त बनाने का आह्वान किया.
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