सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान- उत्पादन की चिंता

Vaccination: राज्यों ने आपूर्ति में कमी की गुहार लगाई है. निजी अस्पतालों ने यह भी कहा कि उनके पास अधिक आबादी वाले हिस्से के लिए टीके नहीं हैं

सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान- उत्पादन की चिंता

अच्‍छी शुरुआत आमतौर पर आधी सफलता मानी जाती है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है. केंद्र सरकार ने शनिवार से 18 से 45 की उम्र वालों के लिए वैक्‍सीनेशन (Vaccination) शुरू कर दिया है. मैक्‍स, फोर्टिस और अपोलो जैसे निजी अस्‍पतालों की बदौलत इसे सीमित प्रबंधन के साथ शुरू किया गया. हालांकि, जिन लोगों को सरकारी अस्पतालों में मुफ्त वैक्‍सीनेशन (Vaccination) का इंतजार है, उनके लिए यह खुशी की बात नहीं है. कई राज्यों ने केंद्र सरकार के तय कार्यक्रम के मुताबिक, 1 मई से 18 से 45 साल के लोगों को वैक्सीन मुहैया कराने से इनकार कर दिया.

सभी राज्यों ने कहा है कि उनके पास पर्याप्त सप्लाई नहीं है. शनिवार को कई प्राइवेट अस्पतालों ने भी कहा कि उनके पास ज्यादा लोगों को टीका लगाने के लिए वैक्सीन नहीं हैं. पिछले कुछ दिनों में 45 साल से ऊपर के लोगों को भी घंटों इंतजार के बाद भी बिना टीका लगवाए घर लौटना पड़ा, क्योंकि, अस्पतालों के पास वैक्सीन ही नहीं है.

पर्याप्त वैक्सीन नहीं होने की वजह से इतने बड़े स्तर पर वैक्सीनेशन प्रोग्राम को लॉन्च करना सिर्फ टोकन सिस्टम जैसा बनता दिख रहा है. देश में रोजाना 26 लाख डोज बनाने की क्षमता है. लेकिन, 18 से 45 की उम्र के लिए होने वाले रजिस्ट्रेशन के पहले दिन यानि 28 अप्रैल को कोविन पोर्टल पर 79.65 लाख लोगों ने वैक्सीन के लिए रजिस्ट्रेशन कराया है. पोर्टल ने प्रति सेकंड 55,000 हिट रिकॉर्ड किए गए. बजट पर बढ़ते दबाव को छोड़ते हुए लगभग सभी राज्यों ने टीकों के लिए ऑर्डर दिए हैं. हालांकि, उनमें से किसी को भी अभी तक अतिरिक्त खेप नहीं मिली है, जिसके जरिए युवाओं को कवर किया जा सके.

गति ही टीकाकरण अभियान की सफलता की कुंजी है. इससे ही जनसंख्या को कवर किया जा सकता है. हालांकि यह Covishield और Covaxin की उत्पादन क्षमता पर निर्भर करता है. जब तक यह पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं होगी, तब तक अन्य सभी बहस बेकार होगी.

वैक्सीनेशन ड्राइव की सफलता उस स्पीड पर ही टिकी है, जिसके जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को टीका लगाया जा सके. हालांकि, यह कोविशील्ड और कोवैक्सीन की उत्पादन क्षमता पर भी निर्भर करता है. जब तक पर्याप्त रूप से शॉट्स उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक दूसरी सभी तरह की बहस निरर्थक हैं.

इसके अलावा वैक्‍सीन की कीमत पर भी विचार करना होगा. आम आदमी पर 800-900 रुपए कोविशिल्ड और करीब 1250 रुपए में कोवैक्सिन का बोझ पड़ेगा. अगर किसी परिवार में चार सदस्य हैं, तो आठ टीकों की कीमत 6,400 रुपए से 10,000 रुपए के बीच होगी.

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