इन 9 तरीकों से समझिए कंपाउंडिंग की ताकत

निवेश की शुरुआत जल्द करने से आपको दुनिया की सबसे दुर्लभ चीज यानी वक्त का फायदा मिलता है. वक्त और कंपाउंडिंग की ताकत क साथ आप पूंजी खड़ी कर सकते हैं.

इन 9 तरीकों से समझिए कंपाउंडिंग की ताकत
मार्केट में उतार-चढ़ाव के दौर में रुपी कॉस्ट एवरेजिंग की एप्रोच आपकी मदद करती है.

अल्बर्ट आइंसटाइन ने कहा था, “कंपाउंड इंटरेस्ट दुनिया का आठवां आश्चर्य है. जो भी इसे समझ जाता है, इससे कमाता है और जो नहीं समझता वो गंवाता है.” हम सबने सिंपल इंटरेस्ट और कंपाउंड इंटरेस्ट के बारे में हाईस्कूल में पढ़ा होगा. इस आर्टिकल में हम दुनिया के आठवें आश्चर्य के बारे में ही बात कर रहे हैं. साथ ही इसमें रुपी कॉस्ट एवरेजिंग एप्रोच की भी बात करेंगे जो कि दुनिया का नौवां आश्चर्य हो सकता है.

कंपाउंडिंग कैसे काम करती है?

कंपाउंडिंग का मतलब है ब्याज पर ब्याज का आकलन.

मान लीजिए आपने 5,000 रुपये 10 साल तक 12 फीसदी ब्याज पर निवेश किए. पहले साल के अंत में आपको 600 रुपये मिलेंगे. इससे आपकी रकम बढ़कर 5,600 रुपये हो जाएगी. दूसरे साल के अंत में आपको 672 रुपये मिलेंगे और ये रकम बढ़कर 6,272 रुपये हो जाएगी.

ये रकम इसी तरह से बढ़ती जाएगी.

10वें साल के अंत में आप 1,664 रुपये पाएंगे और आपका 5,000 रुपये का निवेश बढ़कर 15,530 रुपये हो जाएगा.

यही कंपाउंडिंग की ताकत है.

कंपाउंडिंग का फायदा कैसे उठाएं

आप सोच रहे होंगे कि आपको निवेश कब शुरू करना चाहिए? इसका सीधा जवाब ये है कि निवेश जितनी जल्दी शुरू किया जाए उतना अच्छा है.

जल्दी शुरू करें

निवेश की शुरुआत जल्द करने से आपको दुनिया की सबसे दुर्लभ चीज यानी वक्त का फायदा मिलता है. वक्त और कंपाउंडिंग की ताकत क साथ आप पूंजी खड़ी कर सकते हैं.

एकमुश्त या SIP क्या सही रहेगा?

कंपाउंडिंग की ताकत एकमुश्त की बजाय SIP में और बढ़ जाती है.

अनुशासन के साथ निवेश

इनवेस्टर को एक बार में पूरा पैसा लगाने की बजाय पीरियॉडिक रूप से निवेश करना चाहिए. इसे अनुशासित निवेश कहते हैं. निवेश में रेगुलर रहिए.

धैर्य

ज्यादातर निवेशक तुरत-फुरत रिटर्न चाहते हैं. तुरंत रिटर्न की खोज में रहना एक सही स्ट्रैटेजी नहीं है. लंबे वक्त में निवेश करना सही होता है. कंपाउंडिंग भी लंबे वक्त में ही काम करती है. ऐसे में धैर्य अहम भूमिका निभाता है.

रुपी कॉस्ट एवरेजिंग एप्रोच

एक और स्ट्रैटेजी जिसने अच्छा रिटर्न दिया है वह है निचले मार्केट पर खरीदना और चढ़े मार्केट पर बेच देना. लेकिन, हमें ये कैसे पता चलेगा कि मार्केट कब नीचे आएगा? यहां पर रुपी कॉस्ट एवरेजिंग एप्रोच काम करती है.

ऐसे समझिए, आप 5,000 रुपये हर महीने निवेश करते हैं. जून से लेकर 6 महीने तक इक्विटी म्यूचुअल फंड में आप पैसा लगा रहे हैं. मार्केट में उतार-चढ़ाव के चलते NAV बदलता रहता है. ऐसे में इस बात के आसार कम ही हैं कि आप हर महीने उसी NAV पर निवेश कर पाएं.

नीचे दी गई तालिका में ये बात आपको समझ आएगीः

इस टेबल में 6 महीने में म्यूचुअल फंड यूनिट्स की खरीदारी की औसत कीमत घटकर 48.33 रुपये हो गई है. 290/6 से ये निकलता है. इस दौरान कुल 630 यूनिट्स खरीदी गईं.

अब मान लीजिए कि आप SIP की बजाय जून में ही एकमुश्त खरीदारी कर लेते. इस मामले में आपकी खरीदारी की कीमत 50 रुपये होती. आपको 600 यूनिट्स मिलतीं.

इस तरह से आप 30 यूनिट्स के नुकसान में रहते.

SIP में आप ऊंचे और गिरे दोनों मार्केट्स में पैसा लगा पाते हैं. दूसरी ओर, एकमुश्त निवेश में आपका चढ़े हुए मार्केट में पैसा लगाने का जोखिम रहता है.

नतीजा

कंपाउंडिंग का फायदा तब सबसे ज्यादा होता है जब आप शुरुआत में ही निवेश शुरू करते हैं. आपको कंपाउंडिंग का फायदा उठाने के लिए एक्सपर्ट होने की जरूरत नहीं है. लंबे वक्त के निवेश में आपको ये फायदा मिलता है. बस आपको अनुशासन में रहकर लगातार निवेश करते रहना है.

रुपी कॉस्ट एवरेज भी एक जबरदस्त एप्रोच है जिसमें आपको गिरते हुए बाजार का फायदा मिलता है. इसमें रिटर्न की भले ही गारंटी नहीं होती है, लेकिन ये उतार-चढ़ाव वाले मार्केट में आपको जोखिम से बचाने में मदद देती है.

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