सरकार ने हेल्थकेयर वर्कर्स को कोविड वैक्सीन के रजिस्ट्रेशन को बंद कर दिया है. इस तरह की शिकायतें आ रही थीं कि हेल्थकेयर वर्कर्स की आड़ में कुछ अयोग्य लोग फर्जी पहचान के सहारे अपनी बारी से पहले ही वैक्सीन लगवा रहे हैं. राज्यों ने हेल्थकेयर वर्कर्स के बारे में अपने इनपुट साझा किए थे और इसमें पाया गया कि पिछले कुछ हफ्तों में ही इनकी संख्या में करीब 25 फीसदी का इजाफा हुआ है. इसके चलते इन लोगों की पहचान पर संहेद पैदा हुआ.
ऐसे में सरकार का हेल्थकेयर वर्कर्स के कोविड वैक्सीन रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाना एक सही फैसला है. लेकिन, सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि बैंक स्टाफ, डिलीवरी बॉय, मीडियाकर्मी, मिल्क बूथ पर काम करने वाले, किराना स्टोर मालिक, सब्जी बेचने वाले जैसे लोगों ने पिछले साल लॉकडाउन के दौरान लगातार काम किया और वे अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम रूप से शामिल रहे. ऐसे लोगों में जो 45 साल से कम के हैं उन्हें सरकार को वैक्सीन लगाने में प्राथमिकता देनी चाहिए. इससे वैक्सीनेशन का दायरा बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
सरकार को साथ ही हॉस्पिटलों को 24 घंटे और सातों दिन वैक्सीन लगाने की इजाजत देनी चाहिए ताकि वैक्सीनेशन की रफ्तार में तेजी आ सके. फिलहाल ज्यादातर हेल्थकेयर सेंटर दिन में ही काम करते हैं.
वैक्सीन की सप्लाई भी तत्काल बढ़ाने की जरूरत है. इस तरह की रिपोर्ट्स आई हैं कि लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया और बाद में उनके पास मैसेज आया कि उनका अपॉइंटमेंट कैंसल हो गया है. वैक्सीनेशन का ये राउंड कारगर साबित हो सकता है क्योंकि इसमें आबादी के ज्यादातर हिस्से को कवर किया जाएगा. समय पर सभी को वैक्सीन मिलने से कोविड को फैलने से रोका जा सकता है. हम एक और लॉकडाउन बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं. इससे बचना लोगों, अर्थव्यवस्था और पूरे देश के हित में होगा.
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