तलाकः क्यों जरूरी है वित्तीय सुरक्षा के इंतजाम करना

UN की रिपोर्ट के मुताबिक, बीते 2 दशकों में भारत में तलाक के मामले दोगुने बढ़ गए हैं. ऐसे में महिलाओं के लिए वित्तीय सुरक्षा के लिए पहले से सजग रहना जरूरी हो जाता है.

तलाकः क्यों जरूरी है वित्तीय सुरक्षा के इंतजाम करना

27 साल की शादी के बाद बिल और मेलिंडा गेट्स तलाक ले रहे हैं. इस खबर के आने के बाद से पूरी दुनिया हैरत में है. माना जा रहा है कि मेलिंडा गेट्स को इस तलाक के बाद अरबों डॉलर की संपत्ति बंटवारे के तौर पर मिलेगी.

ऐसे में भले ही ये खबर निराश करती है, लेकिन इसमें कुछ सबक भी छिपे हुए हैं.

मसलन, शादी के बंधन में बंधने जा रहे लोगों और खासतौर पर महिलाओं को अपने वित्तीय अधिकारों और भविष्य को सुरक्षित करने के इंतजाम समय पर शुरू कर देने चाहिए. भारत के संदर्भ में ये बात और अहम हो जाती है.

मसलन, भारत में शादी को एक धार्मिक मान्यता हासिल है और हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के तहत इसे कॉन्ट्रैक्ट नहीं माना जाता है. हालांकि, मुस्लिमों और ईसाइयों में कुछ हद तक शादी को कॉन्ट्रैक्ट की शक्ल में देखा जाता है.

ऐसे में तलाक के बाद के हालात में पहले से कोई पुख्ता इंतजाम या शर्तें तय नहीं होती हैं. अक्सर कोर्ट में पति-पत्नियों में तल्ख बहस, आरोप-प्रत्यारोप और झगड़े देखे जाते हैं.

इनमें शादी के बाद मेंटेनेंस, एकमुश्त रकम और बच्चों की कस्टडी जैसे मसले शामिल होते हैं. महिलाओं के लिए यह एक तनावपूर्ण प्रक्रिया होती है और तलाक के बाद की उनकी जिंदगी अनिश्चितता भरी होती है.

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में तलाक के मामले 1 फीसदी के करीब हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में हर 1,000 शादियों में 13 में तलाक हो जाते हैं. साथ ही भारत में हर साल तलाक के मामलों में इजाफा हो रहा है.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में कहा गया है कि बीते दो दशकों में भारत में तलाक के मामले दोगुने बढ़ गए हैं. ऐसे में महिलाओं के लिए अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए पहले से सजग रहना जरूरी हो जाता है.

मौजूदा कोविड के दौर ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, लॉकडाउन के दौरान पूरी दुनिया में घरेलू हिंसा के मामलों में 20% इजाफा हुआ है.

दूसरी ओर, पश्चिमी देशों में Prenuptial एग्रीमेंट एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें शादी से पहले ही तलाक के बाद संपत्ति के बंटवारे की शर्तें तय हो जाती हैं. हालांकि, भारत में ये अभी भी एक टैबू है और हिंदू मैरिज एक्ट में इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट्स को वैधता नहीं है.

भले ही इस तरह के कॉन्ट्रैक्ट्स न किए जाएं, लेकिन खासतौर पर महिलाओं को अपनी वित्तीय सुरक्षा के लिए समय रहते इंतजाम शुरू कर देने चाहिए.

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