Mutual Fund: आपने कई लोगों से सुना होगा कि म्यूचुअल फंड पैसा कमाने का बेहद आसान तरीका है, इन्वेस्ट एंड फर्गेट (Invest & Forget). लेकिन क्या ये सही तरीका है? बिलकुल नहीं. आपने जिस फंड में पैसा लगाया है, वह कैसा प्रदर्शन कर रहा है, ये जानना आपके लिए बेहद जरूरी है.
फंड में निवेश कर भूल जाना समझदारी नहीं क्योंकि आप फिर तय नहीं कर पाएंगे कि आपका चुना फंड बाकियों से बेहतर है या नहीं और ऐसा कर बढ़िया कमाई से चूक सकते हैं.
तो आइए जानते हैं की फंड को ट्रैक कैसे करें.
कुछ लोग अपने म्यूचुअल फंड को हर रोज चेक करते हैं. तो कुछ लोग सालों तक अपने फंड की NAV नहीं देखते. उसे ट्रैक नहीं करते. ये दोनों चीजे गलत है. आपको कम से कम तीन महीने में एक बार अपने म्यूचुअल फंड को ट्रैक अवश्य करना चाहिए.
म्यूचुअल फंड्स को ट्रैक करने का तरीका बहुत ही आसान है. आपके पास फंड हाउस से स्टेटमेंट आता है, उसमें सारी चीजें आप देख सकते हैं. दूसरा ये कि, अगर आपने किसी एडवाइजर या ड्रिस्ट्रीब्यूटर के जरिए निवेश किया है तो वो आपको एक स्टेटमेंट बनाकर हर महीने आपको भेजेगा. लेकिन ऐसा नहीं होता है तो कुछ वेबसाइट हैं जिनपर म्यूचुअल फंड की सारी जानकारी होती है. आप इन वेबसाइट्स पर जा कर अपने फंड्स का पोर्टफोलियो, एक्सपेंस रेशियो और बाकी सारे डिटेल्स चेक कर सकते हैं. ये सारी डिटेल्स आपको फंड की इंडिविजुअल वेबसाइट पर भी मिल जाएंगी.
हर म्यूचुअल फंड का एक बेंचमार्क होता है. बेंचमार्क वो इंडेक्स है जिसमें शामिल शेयरों से मिलता-जुलता निवेश आपका फंड करता हो. फंड के प्रदर्शन की तुलना इस बेंचमार्क के साथ करके आप ये देख सकते हैं कि आपका फंड बेंचमार्क से अच्छा प्रदर्शन कर रहा है या नहीं. इक्विटी म्यूचुअल फंड स्कीम का प्रदर्शन शेयरों में होने वाले उतार-चढ़ाव पर निर्भर करता है. इसलिए स्कीम के रिटर्न का आकलन करने के लिए फंड के बेंचमार्क से इसकी तुलना करनी चाहिए.
इसे एक उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए, आपने एक लार्जकैप फंड में निवेश किया है, जिसका बेंचमार्क निफ्टी 50 है और इसने एक साल में 25 फीसदी रिटर्न दिया है. समान अवधि में निफ्टी ने 20 फीसदी दिया है. इसका मतलब है कि आपको फंड ने शानदार रिटर्न दिया है.
आपको एक बात का ध्यान रखना होगा कि तुलना समान कैटेगरी वाले फंड्स के बीच होनी चाहिए. जानकारों का कहना है कि लार्ज कैप फंड की तुलना स्मालकैप फंड या दूसरे एसेट क्लास, मसलन गोल्ड, एफडी और रियल एस्टेट से नहीं की जा सकती. हर कैटेगरी के फंड का प्रदर्शन अलग-अलग होता है.
फाइनेंशियल एनालिस्ट मानते हैं कि लगातार बेहतर प्रदर्शन फंड के चुनाव का महत्वपूर्ण पैरामीटर है. अगर फंड का प्रदर्शन उतार-चढ़ाव भरा है यानी तेजी के दौर में शानदार प्रदर्शन जबकि मंदी में कमजोर प्रदर्शन. इस तरह के फंड को अपने पोर्टफोलियो में शामिल करने से बचें.