इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करते समय इन गलतियों को करने से बचें

ITR: ITR फाइल करते समय टैक्सपेयर उन सेक्शन की अनदेखी करते हैं जो टैक्स छूट की इजाजत देते हैं. इसलिए वो पैसे बचाने का मौका गवा देते हैं.

  • Team Money9
  • Updated Date - October 27, 2021, 03:05 IST
Income Tax Department issued refund of Rs 51,531 crore, much less than last year

फॉर्म 26AS टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स पासबुक की तरह है. इसमें परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) के अगेंस्ट टैक्सपेयर की सभी ट्रांजिशन इंफॉर्मेशन शामिल हैं.

फॉर्म 26AS टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स पासबुक की तरह है. इसमें परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) के अगेंस्ट टैक्सपेयर की सभी ट्रांजिशन इंफॉर्मेशन शामिल हैं.

ITR: इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना एक टैक्सपेयर के लिए सबसे जरूरी कामों में से एक है. भविष्य में परेशानी से बचने के लिए बिना कोई गलती किए ITR फाइल करना जरूरी है. सरकार ने असेसमेंट ईयर 2021-22 के लिए ITR फाइल करने की आखिरी तारीख दिसंबर के अंत तक बढ़ा दी है. नए इनकम टैक्स पोर्टल पर ग्लिच की वजह से ये समय सीमा बढ़ा दी गई है, ग्लिच के चलते टैक्सपेयर के लिए ITR फाइल करना मुश्किल हो गया था. फिर भी यदि कोई नई समय सीमा के भीतर रिटर्न फाइल नहीं कर पाता, तो उसे लेट फीस का भुगतान करना पड़ सकता है.

चार्टर्ड एकाउंटेंट सुमन नंदी ने कहा, “ITR फाइल करने के दौरान, कई बार सामान्य टैक्सपेयर इनकम टैक्स एक्ट के उन सेक्शन की अनदेखी करते हैं जो टैक्स छूट की इजाजत देते हैं. इसलिए वो पैसे बचाने का मौका गवा देते हैं.”

यहां कुछ सामान्य गलतियां हैं जो लोग टैक्स रिटर्न फाइल करते समय करते हैं.

गलत फॉर्म सिलेक्शन

गलत फॉर्म का सिलेक्शन परेशानी पैदा करता है. चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपन दास के मुताबिक, गलत फॉर्म का इस्तेमाल करके इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करना टैक्स कानूनों के तहत ‘डिफेक्टिव’ माना जाता है. उस स्थिति में, IT डिपार्टमेंट संबंधित टैक्सपेयर को एक डिफेक्टिव नोटिस भेज सकता है.

गलत पर्सनल डिटेल

पिछले कुछ सालों में, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने इनकम टैक्स फाइल करने के प्रोसेस को सरल बनाया है. लेकिन हर साल गलत पर्सनल डिटेल जैसे कि नाम, बैंक अकाउंट नंबर, IFSC कोड और पते की वजह से कई रिटर्न रिजेक्ट कर दिए जाते हैं. इससे रिफंड में देरी होती है. इसलिए ITR भरते समय सावधान रहें.

गलत असेसमेंट ईयर

भारत में 1 अप्रैल से 31 मार्च तक के पीरियड को फाइनेंशियल ईयर के तौर पर जाना जाता है. असेसमेंट ईयर वो ईयर है जो फाइनेंशियल ईयर के बाद आता है.

कई टैक्सपेयर असेसमेंट ईयर को फाइनेंशियल ईयर के साथ कन्फ्यूज करते हैं. उदाहरण के लिए, ज्यादातर लोग फाइनेंशियल 2020-21 के लिए अभी ITR फाइल करेंगे जो कि (2021-22) असेसमेंट ईयर है.

इनकम का सोर्स

इनकम के प्राइमरी सोर्स के अलावा किसी दूसरे सोर्स से होने वाली हर इनकम, चाहे वो टैक्सेबल हो या नहीं, उसे
डिस्क्लोज किया जाना चाहिए. टैक्स कानूनों के तहत कोई भी नॉन-डिस्क्लोजर एक गंभीर अपराध है.

किसी भी गलती से टैक्सपेयर को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिलने की संभावना बढ़ जाती है. इनकम टैक्स के
वकील मानश घोष ने कहा, “कई मामलों में हम देखते हैं कि क्लाइंट सभी टर्नओवर डिटेल को मेंशन करना भूल जाते हैं.
ऐसा अक्सर होता है. इस तरह की गलती से बचा जाना चाहिए.”

26AS को अनदेखा करना

फॉर्म 26AS टैक्सपेयर्स के लिए इनकम टैक्स पासबुक की तरह है. इसमें परमानेंट अकाउंट नंबर (PAN) के अगेंस्ट
टैक्सपेयर की सभी ट्रांजिशन इंफॉर्मेशन शामिल हैं.

मनश घोष ने कहा, ‘इसलिए हर टैक्सपेयर के लिए ITR फाइल करने से पहले फॉर्म 26AS को चेक करना सबसे जरूरी है. किसी भी लापरवाही से कम रिटर्न या फिर ज्यादा टैक्स चुकाना पड़
सकता है.

जॉब चेंज

यदि आपने फाइनेंशियल ईयर के दौरान नौकरी बदली है, तो ITR में दोनों एंप्लॉयर की इनकम को कंसीडर किया जाना
चाहिए. यदि इसका खुलासा नहीं किया जाता है, तो आपको इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से नोटिस मिल सकता है.

Published - October 27, 2021, 03:05 IST