डे केयर और OPD ट्रीटमेंट में होता है अंतर, हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले पता करें इस सुविधा के बारे में

डे केयर ट्रीटमेंट में 24 घंटे से कम समय के लिए अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत होती है, जबकि OPD में इमीडियेट भर्ती होने की कोई जरूरत नहीं होती है.

डे केयर और OPD ट्रीटमेंट में होता है अंतर, हेल्थ इंश्योरेंस लेने से पहले पता करें इस सुविधा के बारे में
बहुत से लोगों में डे केयर और ओपीडी ट्रीटमेंट के बीच के अंतर को समझने में खासा दिक्कत होती है,

कोविड -19 संक्रमण के कारण हुई हेल्थ इमरजेंसी ने हेल्थ इंश्योरेंस के महत्व को बहुत बढ़ा दिया है. कई लोग बीमारी से सफलतापूर्वक उबर चुके हैं, जबकि कुछ लोगों में पोस्ट-कोविड लक्षणों से परेशानी अभी भी बनी हुई है. ऐसे में कई लोगों को आउटपेशेंट डिपार्टमेंट ट्रीटमेंट (ओपीडी) के साथ-साथ डे केयर ट्रीटमेंट के लिए संबंधित रोगियों की व्यक्तिगत जरूरतों के आधार पर बुलाया जाता है. बहुत से लोगों में डे केयर और ओपीडी ट्रीटमेंट के बीच के अंतर को समझने में खासा दिक्कत होती है, जिससे यह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के साथ कुछ तकनीकी मुद्दों का कारण भी बन सकता है. हम आज आपको डे केयर और ओपीडी से जुड़ी डिटेल बता रहे हैं.

क्या होता है ओपीडी और डे केयर ट्रीटमेंट

ओपीडी, दवाओं और नियमित जांच के लिए एक मरीज के डॉक्टर के पास जाने को संदर्भित करता है. इसके लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है. इस बीच, डेकोर उपचार के लिए आपको 24 घंटे से कम समय तक अस्पताल में रहने की आवश्यकता होती है. यहां, इलाज से पहले लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है. अधिकांश हेल्थ इंश्योरेंस प्लान में कुछ प्रकार के डे केयर ट्रीटमेंट शामिल होते हैं. लेकिन कुछ ही हेल्थ इंश्योरेंस OPD ट्रीटमेंट के लिए कवरेज प्रदान करते हैं.

डे केयर ट्रीटमेंट में डायलिसिस, कीमोथेरेपी, मोतियाबिंद और टॉन्सिल्लेक्टोमी जैसे उपचार शामिल हैं. आपके हेल्थ इंश्योरेंस में शामिल सभी डेकोर की एक डिटेल लिस्ट आपके पॉलिसी डॉक्यूमेंट में और बीमाकर्ता की वेबसाइट पर उपलब्ध उल्लिखित होती है. उनकी नीति के तहत दी जाने वाली सीमाओं के साथ ही मिलने वाली सुविधाओं को समझने के लिए आपको इसे ध्यान से पढ़ना चाहिए.

OPD और डे केयर में अंतर

ट्रीटमेंट के लिए कम समय की जरूरत के कारण डे केयर और ओपीडी ट्रीटमेंट एक जैसे लगते हैं, लेकिन बीमा लाभ और कवरेज के मामले में दोनों के बीच प्रमुख अंतर होता है.

डे केयर ट्रीटमेंट के लिए रोगी को कुछ घंटों के लिए अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है, भले ही चिकित्सा प्रक्रिया में कम समय लगे पर उसके बाद खर्चों का दावा आपके हेल्थ इंश्योरेंस प्रोवाइडर के साथ आसानी से किया जा सकता है और यदि उक्त डे केयर ट्रीटमेंट किसी ऐसे आउट पेशेंट के लिए किया जाता है, जिसे अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं है तो डे केयर क्लेम प्रक्रियाओं के तहत मान्य नहीं माना जाता है.

टेक्नोलॉजिकल प्रगति के कारण, कई प्रकार के ट्रीटमेंट अब 24 घंटे से भी कम समय में किए जाते हैं, जिससे मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता नहीं होती है. जैसे कि मोतियाबिंद माइनर सर्जरी अब तेजी से विकसित तकनीक और चिकित्सा विज्ञान के चमत्कारों के कारण एक दिन के भीतर समाप्त हो जाती है. इसके लिए अब आपको हॉस्पिटल में एडमिट होने की भी आवश्यकता नहीं पड़ती है. बता दें कि बीमाकर्ता आपकी पॉलिसी के नियमों और शर्तों के अनुसार ऐसे कम अवधि के उपचारों के लिए भी आपको कवरेज प्रदान करते हैं.

जबकि ओपीडी ट्रीटमेंट के मामले में तत्काल अस्पताल में भर्ती होने की कोई आवश्यकता नहीं है. ओपीडी सुविधाओं का लाभ उठाने के बाद, व्यक्ति बिलों का भुगतान कर सकता है और यदि पॉलिसी लीवरेज प्रदान करती है तो व्यक्ति बाद में क्लेम के लिए इसे फाइल कर सकता है. वायरल बुखार या संक्रमण के लिए नियमित परामर्श OPD ट्रीटमेंट का एक उदाहरण है.

इन बातों का रखें ख्याल

जरूरतों की प्राथमिकता के अनुसार आपको हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेनी चाहिए. सबसे पहले यह मूल्यांकन करें कि आपके लिए क्या आवश्यक है और उसी के अनुसार एक पॉलिसी का चयन करें. सभी पॉलिसी OPD उपचार के लिए कवरेज प्रदान नहीं करती हैं. यदि आपको वास्तव में ऐसे मामलों के लिए सुरक्षा की आवश्यकता है तो ऐसी प्लान चुनें जो आपको उस तरह की राहत दे सके.

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