अस्पताल में खाली नहीं है बेड तो घर पर हो रहे इलाज के लिए आपका हेल्थ इंश्योरेंस उठाएगा मेडिकल खर्च

अक्सर ऐसी स्थितियां सामने आती हैं जब अस्पताल में रहने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होती है.

अस्पताल में खाली नहीं है बेड तो घर पर हो रहे इलाज के लिए आपका हेल्थ इंश्योरेंस उठाएगा मेडिकल खर्च
हेल्थ इंश्योरेंस में कैशलेस क्लेम, क्लेम सेटलमेंट का एक तरीका है, जहां पॉलिसी होल्डर को इलाज के लिए कैश का भुगतान नहीं करना होता है

आज के दौर में किसी भी मेडिकल इमरजेंसी में मदद के लिए हेल्थ इंश्योरेंस सबसे कारगर हथियार है. आमतौर पर हेल्थ इंश्योरेंस (Health Insurance) को अस्पताल में इलाज के दौरान होने वाले खर्च में इस्तेमाल किया जाता है लेकिन अक्सर ऐसी स्थितियां सामने आती हैं जब अस्पताल में रहने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होती है. इसके मद्देनजर ही घर में इलाज का कॉनसेप्ट सामने आया है.

बजाज आलियांज जनरल लाइफ इंश्योरेंस के चीफ टेक्निकल ऑफिसर टी ए रामालिंगम के मुताबिक “डोमिसिलिअरी हॉस्पिटलाइजेशन यानि घर पर रहकर किसी बीमारी/चोट का इलाज जिसे सामान्य तौर पर अस्पताल में देखभाल और उपचार की आवश्यकता होती है, लेकिन वास्तव में निम्नलिखित में से किसी भी परिस्थिति में घर पर सीमित रहते हुए लिया जाता है. जैसे मरीज को अस्पताल में लाने ले जाने में समस्या होती हो. अस्पताल में कमरे की कमी के चलते घर पर इलाज कराना मजबूरी हो.”

कोरोना से हेल्‍थ सेक्‍टर चरमराया था

कोरोना की दूसरी लहर के दौरान, अचानक मरीजों के बढ़ जाने के चलते देश की स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई थी. न देश के अस्पतालों में आईसीयू मौजूद थे और न ही ऑक्सीजन सिलेंडर. देश ने इस दौरान भयावह हालातों को देखा है. इस दौरान बहुत से लोग अस्पताल में बेड मौजूद नहीं होने के कारण घर पर इलाज कराने के लिए मजबूर थे. इस दौरान घर पर इलाज कराना ज्यादा किफायती साबित हुआ.

लोगों के लिए खराब स्वास्थ्य व्यवस्था को देखते हुए बीमा कंपनियों ने घर में होने वाले इलाजों के क्लेम को स्वीकारना शुरू कर दिया. मई और जून के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर की कीमत आसमान छू रही थी. इसके चलते लोगों ने हेल्थ इंश्योरेंस के लिए क्लेम दाखिल किया, ताकि उनके खर्च का भुगतान हासिल हो सके.

अस्‍पताल में भर्ती होने का विकल्‍प

चूंकि इंश्योरेंस क्षेत्र में अभी तक घरेलू उपचार की सुविधा नहीं है, कुछ खास नियम और शर्तों के तहत घरेलू अस्पताल में भर्ती होने का विकल्प शामिल करते हैं. जबकि, कुछ बीमा कंपनियां अलग बीमा राशि के लिए अतिरिक्त राइडर के रूप में इस लाभ का उपयोग करने की अनुमति देती हैं.

इंश्योरेंस प्रदाता कुछ कारणों से मरीज के अस्पताल से दूर रहने के दौरान हुए मेडिकल खर्चों को कवर करता है. हालांकि, क्लेम की राशि हासिल करने के लिए मरीज को कुछ आवश्यक शर्तें पूरी करनी होंगी. घरेलू इलाज के लिए क्लेम तभी मिलता है, जब इसमें किसी सत्यापित डॉक्टर की लिखित सिफारिश के साथ-साथ कम से कम तीन दिनों की निरंतर बीमारी का लेखा जोखा शामिल होना चाहिए.

घर पर रहकर इलाज कराना बेहतर

जब बार-बार अस्पताल जाना मुश्किल हो तो मरीज के लिए घर पर रहकर इलाज कराना एक बेहतर विकल्प साबित होता है. कई बार परिवारों को मेडिकल बिल पर क्लेम हासिल करने के लिए मरीज को अस्पताल में एडमिट कराना पड़ता है. लेकिन वास्तविक केसों में, घर में इलाज कराना, अस्पताल की तुलना में ज्यादा बेहतर साबित होता है. इस दौरान मरीज का ज्यादा बेहतर ढंग से इलाज कराया जा सकता है.

ऐसा ही, अगर अस्पताल में बेड मौजूद नहीं होने की स्थिति में मरीज को घर पर इलाज कराना जरूरी हो जाता है. लेकिन इस मामले में पॉलिसी होल्डर को साबित करना होता है कि अस्पताल में वाकई बेड मौजूद नहीं हैं. इसके अतिरिक्त इलाज करने वाले डॉक्टर रेगुलर साइन वाली डेली मॉनिटिरिंग रिपोर्ट तैयार करनी होती है.

कोरोना से सबक लेते हुए, पॉलिसी होल्डर को मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए एक कॉन्प्रेहेन्सिव इंश्योरेंस की सख्त जरूरत है. हालांकि ये जानना कठिन है कि क्या हर मेडिकल इंश्योरेंस में घर पर इलाज कराने पर क्लेम स्वीकार करा जाता है. कॉमन बीमारी जैसे अस्थमा, हाइपरटेंशन, मिर्गी, डायबिटीज, डायरिया आदि की स्थिति में घर में इलाज स्वीकार नहीं किया जाता है.

अभी घर में इलाज कराने पर मिलने वाली मेडिकल हेल्थ इंश्योरेंस की सुविधा सीमित है. खासकर महामारी के दौर में ये सुविधा काफी कारगर साबित हो सकती है. एक पॉलिसी बायर के रूप में, ये जरूरी है कि पॉलिसी खरीदने से पहले आप उसके नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें. ऐसा करने से आधी तैयारी पहले ही पूरी हो जाती है.

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