बीमा प्रीमियम पर 18 फीसदी GST लगाने को लेकर ये बोले IRDA के पूर्व सदस्य

GST On Insurance Premium: साठे ने कहा कि इस क्षेत्र का विकास सिर्फ बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी को इस दिशा में आगे बढ़ना होगा.

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  • Publish Date - November 9, 2021 / 03:38 PM IST
बीमा प्रीमियम पर 18 फीसदी GST लगाने को लेकर ये बोले IRDA के पूर्व सदस्य
 साठे ने कहा, "बीमा कंपनियां लंबी अवधि की देनदारियां लेती हैं, लेकिन बाजार में कोई मैचिंग एसेट इंस्ट्रूमेंट नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप एसेट लायबिलिटी मिसमैच हो जाती हैं.

GST On Insurance Premium: एक आम आदमी के लिए आपात स्थिति में अगर कोई चीज काम आती है तो वो है बीमा. अगर सरकार इस पर ही अधिक टैक्स वसूलने लग जाए तो आम आदमी का बजट गड़बड़ा जाता है. बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के मुताबिक बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI-Insurance Regulatory and Development Authority) के पूर्व सदस्य नीलेश साठे ने कहा कि सरकार बीमा प्रीमियम पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगा रही है जो कि गलत है. साठे ने बिजनेस स्टैंडर्ड के एक कार्यक्रम में यह बात कही.

साठे ने कहा कि इस क्षेत्र में सरकार द्वारा इतना अधिक टैक्स लगाना कहीं से सही  नहीं है जबकि वित्तीय क्षेत्र में अन्य लोगों को इसमें छूट दी गई है.

लोगों को अब किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल पा रही है इसलिए लोगों के लिए बीमा अब अनिवार्य हो गया है. आधे से अधिक जनता बीमा पर निर्भर हैं.

देखा जाए तो सभी आवश्यक वस्तुएं जीएसटी के दायरे से बाहर हैं तो क्यों प्रीमियम पर इतना कर लगाया जा रहा है वह भी इतना अधिक. दुनिया में कही भी प्रीमियम पर इतना अधिक कर नहीं देना पड़ता.

बीमा नियामक के रिक्त पदों को नहीं भर रही सरकार 

साठे ने कहा कि बैंकिंग सेवाओं और म्युचुअल फंड सेवाओं पर इस तरह का कर नहीं है, ये भी वित्तीय सेवाएं हैं. सरकार की बीमा क्षेत्र के प्रति “स्पष्ट उदासीनता” साफ थी जब राज्य के स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों के लिए कोई तत्काल पंजीकरण नहीं किया गया था.

उन्होंने कहा कि सरकार बीमा नियामक के रिक्त पदों को नहीं भर रही है. आईआरडीएआई पिछले 5-6 महीनों से दिशाहीन है. सदस्यों के पद खाली पड़े हैं. संस्थानों को यदि समयबद्ध तरीके से नहीं चलाया गया तो वे कमजोर हो जाएंगे.

इस क्षेत्र का विकास सिर्फ इंश्योरेंस कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं 

साठे ने कहा कि इस क्षेत्र का विकास सिर्फ बीमा कंपनियों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि सभी को इस दिशा में आगे बढ़ना होगा. उन्होंने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि GDP, रोजगार और प्रति व्यक्ति की आय (per capita income) में बढ़ोतरी हो.

बीमा कंपनियों के समक्ष दूसरी भी चुनौतियां हैं. ऊंचे सॉल्वेंसी अनुपात को देखते हुए प्रमोटरों को हमेशा कंपनी को विकास की दिशा में आगे बढ़ाने से पहले पूंजी सक्षम बनाना चाहिए.

साठे ने कहा, “बीमा कंपनियां लंबी अवधि की देनदारियां लेती हैं, लेकिन बाजार में कोई मैचिंग एसेट इंस्ट्रूमेंट नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप एसेट लायबिलिटी मिसमैच हो जाती हैं.”

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