Insurance Policies लेने जा रहे हैं? इस तरह करें सही बीमा कवर का आंकलन

बीमा उत्पाद खरीदते वक्त सही कवरेज का चुनाव करना बहुत आवश्यक होता है, ताकि आप आपात स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार हो पाएं.

Insurance Policies लेने जा रहे हैं? इस तरह करें सही बीमा कवर का आंकलन
खास बात तो ये है कि NRI को भारत में रहने की भी जरूरत नहीं है.

किसी बीमा पॉलिसी से न केवल आपको सुरक्षा कवर प्राप्त होता है, बल्कि यह आपकी संपत्ति में भी इजाफा करती है. इसकी वजह से आप किसी इमरजेंसी में भी अपने या अपने परिवार के वित्तीय लक्ष्यों को प्राप्त कर पाते हैं. हालांकि, कोई भी बीमा उत्पाद खरीदते वक्त सही कवरेज का चुनाव करना बहुत आवश्यक होता है, ताकि आप आपात स्थिति के लिए पूरी तरह से तैयार हो पाएं. यहां हम आपको सही कवरेज साइज तय करने के तरीके बता रहे हैं.

अपनी जीवन बीमा जरूरतों का अनुमान लगाएं

लाइफ इंश्योरेंस कवर तय करने का सबसे आसान तरीका यह है कि कवरेज आपकी मौजूदा सालाना आमदनी का 15 से 20 गुना के बीच होना चाहिए. यदि पॉलिसीधारक की मौजूदा सालाना आय 20 लाख रुपए है तो बीमा कवर 3 से 4 करोड़ रुपए के बीच होना चाहिए. ताकि आपके परिवार को 5 फीसदी के सालाना रिटर्न के हिसाब से 15-20 लाख रुपए मिलता रहे. दूसरे तरीके को ह्यूमन लाइफ वैल्यू (HLV) विधि कहते हैं. इसमें आपके भविष्य की आमदनी को वर्तमान दर पर कैलकुलेट किया जाता है, और व्यक्तिगत खर्च को घटा दिया जाता है. HLV विधि को बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह आपकी जरूरतों का सही आंकलन कर पाती है.

अपनी हेल्थ इंश्योरेंस जरूरतों का आंकलन करें

हेल्थ कवर कई बातों पर निर्भर करता है, जिसमें इलाज का खर्च, बढ़ता मेडिकल खर्च वगैरह शामिल है. संभव है कि आपके पास ग्रुप इंश्योरेंस पॉलिसी हो, लेकिन आपके पास अलग से व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा भी होना चाहिए. क्योंकि उम्र बढ़ने पर हेल्थ पॉलिसी खरीदना मुश्किल हो जाता है. छोटे शहरों में रहने वालों के पास 5-10 लाख रुपए का और बड़े शहरों में निवास करने वालों के पास 10-25 लाख का स्वास्थ्य बीमा होना चाहिए.

पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस

एक्सीडेंट से व्यक्ति की रिपेमेंट क्षमता कम हो जाती है, खास तौर पर उन लोगों की, जिन्होंने होम या पर्सनल लोन वगैरह लिए हों. इसलिए पॉलिसी लेने वक्त आपको अपनी देनदारियों का हिसाब कर लेना चाहिए.

होम इंश्योरेंस की आवश्यकता

होम इंश्योरेंस में मकान की लागत को कवर किया जाता है. अपनी प्रॉपर्टी को मार्केट वैल्यू के आधार पर कवर न करें, क्योंकि यह जमीन के मूल्य पर आधारित होती है, बल्कि उसके क्षेत्रफल को संबंधित शहर में प्रति वर्ग फीट निर्माण लागत से गुणा कर, कवरेज का फैसला लें. साथ ही डिप्रिशिएशन का भी ध्यान रखें. इसी तरह अन्य मूल्यवान वस्तुओं को भी कवर किया जाना चाहिए.

हमें फॉलो करें

(मार्केट अपडेट और जाने अमीर कैसे बने सिर्फ आपके Money9 हिंदी पर)

लेटेस्ट वीडियो

Money9 विशेष