जल्द मिल सकती है महंगे तेल से राहत, पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने की हो रही तैयारी

GST on Petroleum Products: केरल हाई कोर्ट ने जून में आदेश दिया था कि पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाए जाने पर फैसला लिया जाना चाहिए

petroleum products may be brought under gst regime

संविधान के अनुसार, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स GST के दायरे में आते हैं. हालांकि, काउंसिल ने अब तक यह तय नहीं किया है इनपर कर की यह व्यवस्था कब से लागू होगी

संविधान के अनुसार, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स GST के दायरे में आते हैं. हालांकि, काउंसिल ने अब तक यह तय नहीं किया है इनपर कर की यह व्यवस्था कब से लागू होगी

गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) काउंसिल 17 सितंबर को होने वाली बैठक में पेट्रोल, डीजल, नैचुरल गैस और एविएशन टर्बाइन फ्यूल जैसे पेट्रोलियम उत्पादों (petroleum products) को GST के दायरे में लाने पर चर्चा कर सकती है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाइयों पर कर रियायत देने और 80 लाख रजिस्टर्ड फर्मों के लिए आधार का प्रमाण अनिवार्य करने की प्रणाली को लेकर भी चर्चाएं हो सकती हैं.

केरल हाई कोर्ट ने जून में आदेश दिया था कि पेट्रोल (petrol) और डीजल (diesel) को GST के दायरे में लाए जाने पर फैसला लिया जाना चाहिए. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इसी के मद्देनजर 17 सितंबर को डिस्कशन हो सकता है.

संविधान के अनुसार, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स GST के दायरे में आते हैं. हालांकि, काउंसिल ने अब तक यह तय नहीं किया है इनपर कर की यह व्यवस्था कब से लागू होगी. रेवेन्यू से जुड़ी चुनौतियों के चलते काउंसिल के सदस्यों के बीच प्रॉडक्ट्स पर समान GST रेट लागू किए जाने को लेकर सहमति नहीं बन पा रही है.

फ्यूल रेवेन्यू में हो जाएगी कटौती

2019-20 के दौरान केंद्र और राज्य स्तर पर पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स से जुटाए गए टैक्स 5.55 लाख रुपये से अधिक थे. पेट्रोल और डीजल अच्छा रेवेन्यू जनरेट करते हैं. हालांकि, इनपर GST लगने से कर घटने के साथ रिटेल प्राइस भी घटेंगी. दिल्ली में पेट्रोल फिलहाल 101.19 रुपये प्रति लीटर और डीजल 88.62 रुपये प्रति लीटर के लगभग बिक रहा है.

सेंट्रल एक्साइज पेट्रोल की कीमत के 32 प्रतिशत से अधिक और राज्य की ओर से लगने वाला वैल्यू-एडेड टैक्स (VAT) 23.07 फीसदी है. डीजल के मामले में ये क्रमशः 35 प्रतिशत से अधिक और 14 फीसदी से ज्यादा हैं.

नुकसान की भरपाई के लिए बढ़ाए गए थे टैक्स

सरकार ने 2020 में फ्यूल पर उत्पाद शुल्क बढ़ाया था. वैश्विक स्तर पर क्रूड के दाम घटने के बीच फ्यूल रेवेन्यू बढ़ाने के लिए ऐसा किया गया था. महामारी के कारण अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होने से राज्य सरकारों ने भी फ्यू प्रॉडक्ट्स पर टैक्स बढ़ाया था.

पेट्रोलियम सेक्टर का 2020-21 में सेंट्रल एक्साइज रेवेन्यू (central excise revenue) में 3,71,726 करोड़ रुपये का योगदान रहा था. VAT में इसकी हिस्सेदारी 2,02,937 करोड़ रुपये रही थी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि राजस्व में कटौती की चिंता के चलते GST के दायरे में सभी पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को ला पाना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में शायद एक या दो प्रॉडक्ट ही GST के तहत शामिल किए जाने पर विचार किया जा सकता है.

Published - September 14, 2021, 01:47 IST