मैन्युफैक्चरिंग में तेजी के बाद भी जुलाई में सर्विस सेक्टर पर भारी पड़ा कोविड

कोविड की दूसरी लहर का असर जुलाई में सर्विस सेक्टर पर भी देखने को मिला. IHS Markit के मुताबिक, लगातार तीसरे महीने सर्विस सेक्टर में गिरावट रही.

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सर्विस सेक्टर में लगातार तीसरे महीने जारी रही गिरावट

सर्विस सेक्टर में लगातार तीसरे महीने जारी रही गिरावट

कोविड की दूसरी लहर का असर जुलाई में सर्विस सेक्टर पर भी देखने को मिला. रिसर्च और एनालिटिक्स कंपनी IHS Markit के मुताबिक, लगातार तीसरे महीने सर्विस सेक्टर में गिरावट जारी रही. जबकि पिछले दो दशकों से इस सेक्टर ने देश की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में अहम योगदान दिया है. टेलीकॉम, होटल, पर्यटन, मनोरंजन और आईटी कंपनियों को इस सेक्टर में गिना जाता है.

जारी है गिरावट

सर्विस परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स 50 से लेवल कम रहा. जुलाई में यह स्तर 45.4 पर रहा. जबकि जून में यह 41.2 के स्तर पर था. इस इंडेक्स को IHS Markit तैयार करती है.

मैन्युफैक्चरिंग में तेजी

दूसरी ओर, IHS Markit मैन्युफैक्चरिंग परचेसिंग इंडेक्स ने जुलाई में 50 के लेवल को पार कर दिया. यह 55.3 के स्तर पर रहा. जून में यह 48.1 के स्तर पर था.

ई-वे बिल्स और जीएसटी कलेक्शन

जुलाई में ई-वे बिल्स और जीएसटी कलेक्शन में तेजी देखी गई. वस्तुओं के आदान-प्रदान का संकेत देने वाला ई-वे बिल्स जुलाई में 6.42 करोड़ रहा. यह बीते चार महीनों में सबसे ज्यादा है. साथ ही जून की तुलना में यह 17 फीसदी अधिक है. इसी तरह, जुलाई में जीएसटी कलेक्शन 1.16 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया. बीते साल की समान अवधि के मुकाबले यह 33 फीसदी अधिक है. जबकि जून 2021 की तुलना में यह करीब 26 फीसदी ज्यादा है.

अप्रैल-जून में देश ने 95 अरब डॉलर का निर्यात किया

अप्रैल-जून क्वार्टर में देश ने 95 बिलयन डॉलर का निर्यात किया, जोकि एक रिकॉर्ड है. यह वित्त वर्ष 2019 की तुलना में 16 फीसदी अधिक है. वित्त वर्ष 2021 की चौथी तिमाही में यह 90 बिलियन डॉलर का था. IHS Markit के इकनॉमिक एसोसिएट डायरेक्टर पॉल अन्ना डि लिमा ने बताया, “कोविड-19 का मौजूदा दौर सर्विस सेक्टर पर काफी भारी पड़ रहा है.”

इनफ्लेशन

लिमा का कहना है कि बिजनेस पर बुरा असर जारी है क्योंकि कोविड का दौर कितना लंबा चलेगा, इसको लेकर अनिश्चितता बनी हुई है. साथ ही इनफ्लेशन और दूसरी वित्तीय समस्याओं को लेकर भी चिंता बनी हुई है. वित्त वर्ष 2021 की जनवरी-मार्च तिमाही की तुलना में अप्रैल-जून तिमाही के दौरान बिजनेस कॉन्फिडेंस इंडेक्स में 27.5 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है.

रेपो और सीआरआर दरों में कोई बदलाव नहीं

इस बीच 6 अगस्त को RBI की मौद्रिक नीति आने वाली है. माना जा रहा है कि रेपो और सीआरआर दरों में कोई बदलाव नहीं होने वाला. RBI के गवर्नर पहले भी कह चुके हैं कि उनकी प्राथमिकता ग्रोथ को बढ़ाने की है.

Published - August 5, 2021, 06:52 IST