साइबर फ्रॉड से बचने के लिए SBI अपने ग्राहकों को दे रहा ये करने की सलाह

Cyber Fraud: अपना इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहेंऔर हमेशा लास्ट लॉग-इन डेट और टाइम चेक करें.

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स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) ने ग्राहकों नेटबैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड स्ट्रॉन्ग रखने की सलाह दी है

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank of India) ने ग्राहकों नेटबैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड स्ट्रॉन्ग रखने की सलाह दी है

Cyber Fraud: लगातार बढ़ रहे साइबर फ्रॉड (Cyber Fraud) को देखते हुए देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने ग्राहकों को जागरूक और सावधान रहने के लिए कहा है.

साथ ही नेट बैंकिंग का प्रयोग करने वालों के लिए कुछ टिप्‍स भी शेयर किए हैं.

ये करें काम

अपना इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड समय-समय पर बदलते रहें. हमेशा लास्ट लॉग-इन डेट और टाइम चेक करें.

अगर आपको एसबीआई की वेबसाइट पर जाना है, तो किसी भी लिंक पर क्लिक करने की बजाय अपने ब्राउज़र की एड्रेस बार में जाकर https://onlinesbi.com टाइप करें. अपने कंप्यूटर को नियमित रूप से एंटीवायरस से स्केन करें

इन कामों को नहीं करने की सलाह

पब्लिक वाईफाई, फ्री वाईफाई, साइबर कैफे और शेयर किये जाने वाले पीसी से इंटरनेट बैंकिंग का उपयोग करने से बचें.

आपकी पर्सनल इन्फॉर्मेशन या आपकी अकाउंट डिटेल्स बैंक साइट पर अपडेट करने पर रिवार्ड देने का वादा करने वाले ई-मेल/एसएमएस/फोन कॉल से दूर रहें.

किसी अनजान व्यक्ति की सलाह पर किसी अनचाहे एप को डाउनलोड ना करें. बैंक की साइट पर जाने के लिए कभी भी मेल या मैसेज बॉक्स में आए किसी लिंक पर क्लिक ना करें.

इन नंबर पर करें शिकायत

भारत सरकार ने इंटरनेट बैंकिंग (Internet Banking) समेत ऑनलाइन फाइनेंस से संबंधित धोखाधड़ी की शिकायत करने के लिए हेल्पलाइन नंबर 155260 जारी किया है.

ऑनलाइन धोखेबाजी का शिकार होने के बाद पीड़ित को पुलिस अधिकारी द्वारा मैनेज हेल्पलाइन पर कॉल करना है. अगर फ्रॉड हुए 24 घंटे से ज्यादा हो गया है तो पीड़ित को नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर एक औपचारिक शिकायत दर्ज करनी चाहिए.

अगर फ्रॉड हुए 24 घंटे से कम समय हुआ है तो ऑपरेटर फॉर्म भरने के लिए अपराध का डिटेल और पीड़ित की निजी जानकारी मांगेगा.

जब दोनों घटना संबंधित वित्तीय संस्थानों तक जानकारी पहुंच जाती है तो एक टिकट रेज किया जाता है. यह फ्रॉड ट्रांजेक्शन टिकट जिस वित्तीय संस्थान से पैसा कटा (डेबिट हुआ) है और जिन वित्तीय संस्थान में गया (क्रेडिट हुआ) है दोनों के डैशबोर्ड पर नजर आता है.

जिस बैंक/वॉलेट में टिकट दिया गया होता है, उसे फ्रॉड ट्रांजेक्शन की जानकारी के लिए जांच करनी होती है. अगर पैसा निकल गया है तो यह पोर्टल में ट्रांजेक्शन की जानकारी देता है और दूसरे वित्तीय संस्थान में जाता है.

अगर फंड नहीं रहता है तो यह उसे टेंप्रेरी होल्ड पर डाल देता है. फंड का आना तब तक जारी रहता है जब तक फंड को होल्ड पर नहीं डाला जाता है या जब तक डिजिटल इकोसिस्टम से बाहर नहीं आता है, इसमें ATM से विड्रॉल, फिजिकल विड्रॉल और यूटिलिटी शामिल हैं.

Published - June 16, 2021, 12:10 IST