Pre-owned Car Loan: कोरोना के बाद लोगों में Personal vehicle के लिए झुकाव बढ़ा है. अब कई लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट से बच रहे है. इस वजह से गाड़ियों की बिक्री में अचानक उछाल आया है. देश में एक तरफ नई गाड़ियों का बाजार तेजी से बड़ा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर पुरानी कारों के खरीदार भी लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में अगर आप पुरानी कार लोन लेकर खरीदने की सोच रहे हैं तो ध्यान रखें की गाड़ी ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए. ऐसा इसलिए कि पुरानी कार पर बैंक ज्यादा ब्याज वसूलते हैं. हम आपको बताते हैं पुरानी गाड़ियों पर लोन लेते समय किन बातों का खास तौर पर ध्यान रखना चाहिए.
यदि आप सेकेंड हैंड कार के लिए किसी बैंक से लोन लेने की सोच रहे है. तो सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि आपको किस बैंक में सबसे कम ब्याज दर पर लोन मिल सकता है. इसके साथ ही कुछ बैंक second hand कार खरीदने के लिए 3 से 5 साल तक के लिए लोन मुहैया करा रहे है. वहीं कुछ बैंक ऐसे भी है जो 7 साल तक के लिए लोन की सुविधा दे रहे है. इसलिए आप जब भी सेकेंड हैंड कार खरीदने के लिए लोन लें, उससे पहले सभी जानकारी जुटा लें.
पुरानी गाड़ी लोन पर लेने से पहले आपको अपने बजट का पूरा ध्यान रखना चाहिए. आपको मालूम होना चाहिए कि आप कितने रुपये डाउन पेमेंट दे पाएंगे और लोन कितने रुपए का लोन लेंगे. अगर आप डाउन पेमेंट कम देते हैं तो आपको लंबी अवधि तक ईएमआई देना होगा. जिसके ब्याज की दर काफी ज्यादा होती है.
लोन की ब्याज दर, प्रोसेसिंग चार्जेज और अन्य चार्जेज के बारे में बैंक से अच्छी तरह मालूमात करें. सामान्यतः बैंक आपके डाउन पेमेंट देने की क्षमता पर आपके लोन की किस्तों की ब्याज की दर तय करता है. साथ ही आपके क्रेडिट स्कोर के बारे में भी वो पूरी तहकीकात करता है. इसलिए आप कहीं ऑनलाइन माध्यमों पर तुलना करके अच्छी डील हासिल कर सकते हैं. ध्यान रखें की गाड़ी ज्यादा पुरानी नहीं होनी चाहिए. ज्यादा पुरानी गाड़ियों पर बैंक लोन देने में हिचकती हैं.
बैंक ज्यादातर सेकेंड हैंड गाड़ियों का धंधा करने वाली कंपनियों के वाहनों को ही लोन देते हैं. हालांकि लोन की लागत में सबसे अहम भूमिका कार की गुणवत्ता या स्थिति की है. कार के चेसिस, इंजन और माइलेज की परख सबसे सघन तरीके से की जाती है. बैंक भी सर्वेयर की रिपोर्ट के आधार पर लोन की दर और रकम तय करते हैं.
कार की डील फाइनल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेज अच्छे से चेक कर लें, जैसे कार का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), बीमा, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) आदि. कार खरीदने के तत्काल बाद बीमा पॉलिसी को अपने नाम पर ट्रांसफर करा लें.