Mann Ki Baat: आत्मनिर्भर भारत, परीक्षाएं सहित इन मुद्दों पर PM मोदी ने की ‘मन की बात’

Mann Ki Baat- पीएम मोदी ने हरिद्वार कुंभ, बच्चों की परीक्षाएं, सफल खेती, पानी का बचाव, संत रविदास जयंती और विज्ञान दिवस पर अपनी बात रखी.

  • Money9 Hindi
  • Publish Date - February 28, 2021 / 12:58 PM IST
Mann Ki Baat: आत्मनिर्भर भारत, परीक्षाएं सहित इन मुद्दों पर PM मोदी ने की 'मन की बात'

Mann Ki Baat: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 74वां संस्करण को संबोधित किया. प्रधानमंत्री इस दौरान पीएम मोदी ने हरिद्वार कुंभ, बच्चों की परीक्षाएं, सफल खेती, पानी का बचाव, संत रविदास जयंती और विज्ञान दिवस सहित तमाम मुद्दों पर अपनी बात रखी. प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान जल संरक्षण के बारे में कई महत्वपूर्ण बातें बताईं. पीएम ने कहा कि जल हमारे लिए जीवन और आस्था है.

पीएम ने कहा कि कल माघ पूर्णिमा का पर्व था. माघ महीना विशेष रूप से नदियों, सरोवरों और जलस्रोत्रों से जुड़ा हुआ माना जाता है. माघ महीने में किसी भी पवित्र जलाशय में स्नान को पवित्र माना जाता है. दुनिया के हर समाज में नदी के साथ जुड़ी हुई कोई न कोई परम्परा होती है. नदियों के तट पर ही अनेक सभ्यताएं विकसित हुई हैं. भारत में कोई ऐसा दिन नहीं होगा जब देश के किसी कोने में पानी से जुड़ा कोई उत्सव न हो.

पीएम मोदी ने कहा कि इस बार हरिद्वार में कुंभ भी हो रहा है. जल हमारे लिए जीवन भी है, आस्था भी है और विकास की धारा भी है. पानी एक तरह से पारस से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है. कहा जाता है पारस के स्पर्श से लोहा, सोने में परिवर्तित हो जाता है. वैसे ही पानी का स्पर्श जीवन के लिए जरूरी है. इसलिए पानी के संरक्षण के लिए हमें अभी से ही प्रयास शुरू कर देने चाहिए. उन्होंने बताया कि अब से कुछ दिन बाद ज​ल शक्ति मंत्रालय द्वारा जल शक्ति अभियान ‘कैच द रेन’ शुरू किया जा रहा है.

मन की बात कार्यक्रम की बड़ी बातें

1- हम अपने सपनों के लिए किसी दूसरे पर निर्भर रहें, ये बिलकुल ठीक नहीं है. जो जैसा है वो वैसा चलता रहे, रविदास जी कभी भी इसके पक्ष में नहीं थे. आज हम देखते हैं कि देश का युवा भी इस सोच के पक्ष में बिलकुल नहीं है.

2- आज ‘National Science Day’ भी है. आज का दिन भारत के महान वैज्ञानिक, डॉक्टर सी.वी. रमन जी द्वारा की गई ‘Raman Effect’ खोज को समर्पित है. केरल से योगेश्वरन जी ने नमो ऐप पर लिखा है कि रमन प्रभाव ( Raman Effect) की खोज ने पूरी विज्ञान की दिशा को बदल दिया था.

3- इस कोरोना के समय में मैंने कुछ समय निकालकर exam warrior book में भी कई नए मंत्र जोड़ दिए हैं. इन मंत्रों से जुड़ी ढेर सारी इंट्रेस्टिंग एक्टीविटीज NarendraModi App पर दी हुई है जो आपके अंदर के exam warrior केा ignite करने में मदद करेंगी.

4- आने वाले कुछ महीने आप सब के जीवन में विशेष महत्व रखते हैं. अधिकतर युवा साथियों की परीक्षाएं होंगी. आप सबको warrior बनना है worrier नहीं. हंसते हुए परीक्षा देने जाना है और मुस्कुराते हुए लौटना है.

5- कुछ दिन पहले हैदराबाद की अपर्णा रेड्डी जी ने मुझसे ऐसा ही एक सवाल पूछा. उन्होंने कहा कि आप इतने साल से पी.एम. हैं, इतने साल सी.एम. रहे, क्या आपको कभी लगता है कि कुछ कमी रह गई. अपर्णा जी का सवाल बहुत सहज है लेकिन उतना ही मुश्किल भी. मैंने इस सवाल पर विचार किया और खुद से कहा मेरी एक कमी ये रही कि मैं दुनिया की सबसे प्राचीन भाषा – तमिल सीखने के लिए बहुत प्रयास नहीं कर पाया, मैं तमिल नहीं सीख पाया. यह एक ऐसी सुंदर भाषा है, जो दुनिया भर में लोकप्रिय है.

6- आप हमारे मंदिरों को देखेंगे तो पाएंगे कि हर मंदिर के पास तालाब होता है. हजो में हयाग्रीव मधेब मंदिर, सोनितपुर के नागशंकर मंदिर और गुवाहाटी में उग्रतारा मंदिर के पास इस प्रकार के तालाब हैं. इनका उपयोग विलुप्त होते कछुओं की प्रजातियों को बचाने के लिए किया जा रहा है.

7- आत्म निर्भर भारत की पहली शर्त होती है- अपने देश की चीजों पर गर्व होना, अपने देश के लोगों द्वारा बनाई वस्तुओं पर गर्व होना. जब प्रत्येक देशवासी गर्व करता है, प्रत्येक देशवासी जुड़ता है, तो आत्मनिर्भर भारत सिर्फ एक आर्थिक अभियान न रहकर एक National spirit बन जाता है.

8- जब आसमान में हम अपने देश में बने Fighter Plane Tejas को कलाबाजिंयां खाते देखते हैं, तब भारत में बने टैंक, मिसाइलें हमारा गौरव बढ़ाते हैं.

9- जब हम दर्जनों देशों तक मेड इन इंडिया वैक्सीन को पहुंचाते हुए देखते हैं तो हमारा माथा और ऊंचा हो जाता है.

10- संत रविदास जी ने समाज में व्याप्त विकृतियों पर हमेशा खुलकर अपनी बात कही. उन्होंने इन विकृतियों को समाज के सामने रखा. उसे सुधारने की राह दिखाई. तभी तो मीरा जी ने कहा था-
“गुरु मिलिया रैदास, दीन्हीं ज्ञान की गुटकी.”रविदास जी कहते थें-
करम बंधन में बन्ध रहियो, फल की ना तज्जियो आस.
कर्म मानुष का धम्र है, सत् भाखै रविदास..

अर्थात हमें निरंतर अपना कर्म करते रहना चाहिए, फिर फल तो मिलेगा ही मिलेगा, कर्म से सिद्धि तो होती ही होती है.

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