महामारी के बाद हीरों की मांग में तेजी, लेकिन इंडस्ट्री को नहीं मिल रहे मजदूर

महामारी के दौरान लगभग 1,25,000 प्रवासी श्रमिकों ने डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग इंडस्ट्री के हब गुजरात को छोड़ दिया था, लेकिन अब तक वो वापस नहीं लौटे हैं.

  • Money9 Hindi
  • Publish Date - September 14, 2021 / 03:07 PM IST
महामारी के बाद हीरों की मांग में तेजी, लेकिन इंडस्ट्री को नहीं मिल रहे मजदूर
श्रमिकों के कमी से जूझ रही सूरत की डायमंड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री

सूरत में डायमंड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को ऐसे समय में श्रमिकों की भारी कमी का सामना करना पड़ रहा है, जब महामारी की वजह से व्यापार ठप होने के बाद इसमें फिर से तेजी आ रही है. महामारी के दौरान लगभग 1,25,000 प्रवासी श्रमिकों (migrant workers) ने भारत के डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग इंडस्ट्री के हब गुजरात को छोड़ दिया था, लेकिन अब तक वो वापस नहीं लौटे हैं. यूनियन के प्रतिनिधियों और इंडस्ट्री एक्जीक्यूटिव के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट पब्लिश की गई है.

कम मेहनताना होने की वजह से नौकरी छोड़ी

डायमंड एक्सपोटर्स खरीफ की बुआई खत्म होने के बाद मजदूरों के लौटने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. कोरोना के फैलने से पहले, सूरत के हीरा व्यापार में छह लाख कर्मचारी थे. यह संख्या गिरकर लगभग 4,75,000 हो गई है. यूनियन के नेताओं के अनुसार, इनमें से कई श्रमिकों ने काफी कम मजदूरी होने की वजह से नौकरी छोड़ी है.

डायमंड वर्कर्स यूनियन का क्‍या है कहना

डायमंड वर्कर्स यूनियन के उपाध्यक्ष भावेश टैंक ने कहा, हीरा व्यापारियों और निर्यातकों से बार-बार अपील करने के बावजूद, मजदूरी में बढ़ोतरी नहीं हुई है. श्रमिकों की कमी के कारण हमें ज्यादा समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, लेकिन कोई अतिरिक्त वेतन नहीं मिल रहा. भावेश ने ये भी कहा कि एक्सपोर्टर्स का कारोबार अच्छा चल रहा है. अमेरिका और चीन में पॉलिश किए गए हीरों की मांग है, इसके बावजूद मजदूरों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

क्या मजदूरों को मिले आय दूसरे स्रोत

यूनियन ने आरोप लगाया है कि लॉकडाउन पीरियड में मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया था, जिसके कारण 20% श्रमिकों को शहर छोड़ना पड़ा. हीरा मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया और गुजरात सरकार से मदद मांगी. इंडस्ट्री एक्जीक्यूटिव्स ने कहा कि वे इस मामले को देख रहे हैं. हालांकि कुछ एक्सपोर्टर्स का कहना है कि श्रमिक इसलिए वापस नहीं लौटे क्योंकि उन्हें उनके होमटाउन में आय के कुछ वैकल्पिक स्रोत मिल गए. वहीं एक प्रमुख एक्सपोर्टर ने कहा, श्रमिक अधिक वेतन की मांग कर रहे हैं, लेकिन वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि हम धीरे-धीरे कोरोना के झटके से उबर रहे हैं.

इस वजह से आ रही समस्या

जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट काउंसिल, गुजरात के रीजनल चेयरमैन दिनेश नवादिया ने कहा कि कुशल और अकुशल श्रमिकों को भुगतान में अंतर के कारण समस्याएं उत्पन्न होती हैं. आमतौर पर, कुशल श्रमिकों को प्रति पीस के आधार पर भुगतान किया जाता है, जबकि अकुशल श्रमिकों को आमतौर पर निश्चित वेतन होता है. हालांकि, अगर किसी कारखाने में श्रमिकों के वेतन के संबंध में कोई समस्या है तो मालिक और श्रमिकों को एक साथ बैठकर समस्या का समाधान करना चाहिए.

भारत ने अप्रैल-जुलाई के बीच में 8.52 अरब रुपये के कट और पॉलिश किए गए हीरों का एक्सपोर्ट किया, जबकि एक साल पहले 2.72 अरब रुपये के हीरे एक्सपोर्ट किए गए थे.

 

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