नहीं होगा डेल्‍टा वैरिएंट का असर, 60 दिन के अंदर लगने लगेगी बच्चों को कोरोना की वैक्सीन

सितंबर-अक्टूबर की शुरुआत में बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होगी. कोवाक्सिन के अलावा जायडस कैडिला की वैक्सीन भी बच्चों के टीकाकरण में शामिल हो सकती है.

  • Money9 Hindi
  • Publish Date - August 19, 2021 / 03:30 PM IST
नहीं होगा डेल्‍टा वैरिएंट का असर, 60 दिन के अंदर लगने लगेगी बच्चों को कोरोना की वैक्सीन
image: unsplash, वैक्सीन मैत्री कार्यक्रम के तहत अक्टूबर-दिसंबर में अतिरिक्त टीकों का निर्यात होगा, देश की जरूरतों को पूरा करने के बाद कोवैक्सीन को दुनिया में भेजा जाएगा.

बच्चों को कोरोना वायरस से बचाने के लिए आने वाले एक से दो महीने में उन्हें वैक्सीन लग सकेगी. पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की निदेशक डॉ. प्रिया अब्राहम ने इस बात की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि 2 से 18 साल की आयु वाले बच्चों में परीक्षण चल रहा है. इसके रिजल्ट काफी संतोषजनक रहे हैं. हमें इस बात उम्मीद है कि सितंबर या अक्टूबर की शुरुआत यानी 60 दिनों के अंदर बच्चों के लिए वैक्सीन उपलब्ध होगी. उनके अनुसार यह वैक्‍सीन कोरोना के डेल्टा वैरिएंट पर भी काफी असरदार है. हालांकि उन्होंने इस बात की संभावना जताई है कि कोवाक्सिन के अलावा जायडस कैडिला की वैक्सीन भी बच्चों के लिए टीकाकरण में शामिल हो सकती है. इन दो वैक्सीन के साथ बच्चों का टीकाकरण शुरू किया जा सकता है.

नाक से दी जाने वाली वैक्सीन भी आने वाली है

डॉ. प्रिया ने बताया कि नाक से दी जाने वाली वैक्सीन और जेनोवा भी आने वाला है. जेनोवा वैक्सीन MRNA पर बेस्ड है. इनके अलावा कोवावैक्स भी जल्द मिल सकती है. नाक से दी जाने वाली वैक्सीन एक अनोखा रिसर्च है जोकि दुनिया में पहली बार भारत में हुआ है. हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक कंपनी इस पर काम कर रही है. इस वैक्सीन के आने के बाद टीकाकरण में काफी तेजी आ सकती है. एक बार में 100 से 200 लोगों को महज एक से दो घंटे में वैक्सीन दी जा सकती है. उन्होंने बताया कि अभी देश में सबसे ज्यादा डेल्टा वैरिएंट मिल रहा है लेकिन वैक्सीन इस वैरिएंट पर असरदार है. वहीं इसका उपयोग स्कूलों में काफी बेहतर तरीके से किया जा सकता है.

घर बैठे करें कोरोना की जांच

डॉ. प्रिया के मुताबिक अब घर बैठे कोरोना वायरस की जांच करने वाली किट्स भी उपलब्ध हैं लेकिन इनका इस्तेमाल बिना लक्षण वाले मरीजों पर ही किया जाना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति में लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो उन्हें RT PCR जांच कराने की सलाह दी जाती है.

 

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