बच्चों की कोविड-19 वैक्सीन को सितंबर तक मिल सकता है अप्रूवल, पूरा हुआ ट्रायल

Corona Vaccine for Children: बच्चों की कोरोना वैक्सीन के लिए 2-18 वर्ष के एज ग्रुप के वॉलंटियर्स में क्लीनिकल स्टडी का ट्रायल फेज पूरा हो चुका है

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  • Publish Date - August 19, 2021 / 04:40 PM IST
बच्चों की कोविड-19 वैक्सीन को सितंबर तक मिल सकता है अप्रूवल, पूरा हुआ ट्रायल
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की डायरेक्टर प्रिया अब्राहम ने बताया कि रिजल्ट को रेगुलेटर्स के सामने पेश किया जाएगा. सितंबर तक या इसके ठीक बाद, बच्चों के लिए कोविड-19 के टीके उपलब्ध हो जाएंगे

भारत में बच्चों के लिए कोरोना वायरस वैक्सीनेशन का अप्रूवल सितंबर तक मिल सकता है. भारत बायोटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर कृष्णा इल्ला सहित वैक्सीन के डेवलपमेंट में शामिल दो ऑफिसर्स ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि 2-18 वर्ष के एज ग्रुप के वॉलंटियर्स में क्लीनिकल स्टडी का ट्रायल फेज पूरा हो चुका है.

भारत में बच्चों के लिए दो वैक्सीन की टेस्टिंग की गई है. भारत बायोटेक की कोवैक्सीन (Covaxin) और जायडस कैडिला की जायकोव-डी (ZyCov-D). Covaxin के फेज II/III ट्रायल में 525 वॉलंटियर, जबकि ZyCov-D के ट्रायल में 12-18 आयु वर्ग में 1,000 वॉलंटियर को शामिल किया गया.

क्लीनिकल ट्रायल का फाइनल फेज खत्म

इल्ला ने बुधवार को डीडी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘कोवैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल का फाइनल फेज खत्म हो गया है. हम उम्मीद कर रहे हैं कि या तो महीने के अंत तक या अगले महीने तक हमें बच्चों को वैक्सीन लगाने के लिए लाइसेंस मिल जाए. यह दुनिया का एकमात्र टीका है जो 2 से 18 साल के बच्चों को दिया जा सकता है’.

क्या कहना है NIV का

भारत बायोटेक ने कोवैक्सिन को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर बनाया है. ICMR के पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) की डायरेक्टर प्रिया अब्राहम को उम्मीद है कि स्टडी के रिजल्ट जल्द ही सामने आएंगे और जल्द ही इसके बाद मंजूरी मिल जाएगी. उन्होंने बताया कि रिजल्ट को रेगुलेटर्स के सामने पेश किया जाएगा. सितंबर तक या इसके ठीक बाद, हमारे पास बच्चों के लिए कोविड-19 के टीके उपलब्ध हो जाएंगे.

जायकोव डी है 66.6% इफेक्टिव

अब्राहम ने कहा, ‘जायडस कैडिला की वैक्सीन भी जल्द से जल्द उपलब्ध हो जाएगी.’ जायकोव डी को बनाने वाली कंपनी का दावा है कि उसके क्लीनिकल ट्रायल के असेसमेंट में वैक्सीन ने 66.6% की प्रभावकारिता (efficacy) दिखाई है.

बूस्टर डोल पर क्या है राय

इल्ला और अब्राहम ने बूस्टर डोज पर भी बात की. दोनों ने कहा कि आने वाले समय में यह आवश्यक हो जाएगा. अब्राहम के मुताबिक, विदेशों में बूस्टर डोज पर स्टडी चल रही है और इसके लिए कम से कम सात टीकों का परीक्षण किया जा चुका है. हालांकि, WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) ने इसे तब तक रोक दिया है, जब तक कि अधिक देश टीकाकरण नहीं कर लेते. ऐसा इसलिए है क्योंकि वैक्सीन की उपलब्धता को लेकर हाई-इनकम और लो-इनकम वाले देशों में बहुत बड़ा गैप है.

नेजल वैक्सीन का भी ट्रायल

इल्ला ने यह भी बताया, ‘इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि बूस्टर डोज की आवश्यकता होगी. हालांकि, हमारी प्राथमिकता सबसे पहले सभी वयस्कों का टीकाकरण करना है. हम कोविड-19 के खिलाफ अपनी नेजल वैक्सीन का भी ट्रायल कर रहे हैं, और कोवैक्सीन की बूस्टर डोज लेने के बजाय हमारे पास कोवैक्सीन की एक डोज और नेजल वैक्सीन की दूसरी डोज लेने का विकल्प भी हो सकता है. इस समय निर्णायक रूप से कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी.’

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