आमतौर पर शहरी इलाकों में पैकेट बंद खाने-पीने की चीजें की ज्यादा बिक्री होती है, लेकिन अब गांवों में भी इसका चलन तेजी से बढ़ा है. ग्रामीण क्षेत्रों में मांग में सुधार के चलते यहां शहरों से ज्यादा FMCG प्रोडक्ट की खपत हो रही है. इस बात का खुलासा बाजार अनुसंधान डेटा से हुआ है. रिपोर्ट के मुताबिक लगभग तीन वर्षों में ऐसा पहली बार है जब शहरों के मुकाबले गांवों में उपभोक्ता वस्तुएं ज्यादा खरीद रहे हैं.
नील्सन आईक्यू के डेटा के मुताबिक ग्रामीण बाजारों में दिसंबर और जनवरी में 6.5%, जबकि फरवरी में 11.1% की वृद्धि दर्ज की गई. जबकि शहरी बाजारों में मांग इसकी तुलना में कम रही है. नील्सन इंडिया में कस्टमर सक्सेज के हेड, रूजवेल्ट डिसूजा ने बताया कि शहरी और ग्रामीण इलाके के बीच विकास दर का अंतर 4-6% से घटकर 1% रह गया है. पहले धीमी ग्रामीण मांग मार्केटर और नीति निर्माताओं के लिए समान रूप से चिंता का विषय रही है, लेकिन पिछली बार मार्च 2021 में शहरों में हुई एफएमसीजी सामानों की बिक्री से ग्रामीण बिक्री ज्यादा रही.
अंग्रेजी अखबार ईटी को डाबर के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि तीसरी तिमाही में ग्रामीण इलाकों से मांग को विकास पर लौटते देखा गया है. अक्टूबर-दिसंबर में ग्रामीण मांग शहरी मांग से 2 प्रतिशत अंक अधिक हो गई है. चालू वित्त वर्ष में ग्रामीण क्षेत्र में एफएफसीजी को बूस्ट करने के लिए 17,000 गांवों तक बढ़ाने के लिए निवेश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि महामारी आने से पहले स्थिति बिल्कुल अलग थी. मगर ग्रामीण मांग शहरी क्षेत्रों की तुलना में अब दोगुनी तेजी से बढ़ रही है.
ब्रांड ने कीमतों में की कटौती
एफएमसीजी बाजार में मांग का लगभग 40% हिस्सा रखने वाले ग्रामीण बाजारों में महंगाई और अनियमित मानसून के कारण दिसंबर तक मांग में 3-5% की गिरावट आई है. पिछली तीन तिमाहियों में कम महंगाई दर और उपभोक्ताओं के सस्ते उत्पादों की ओर बढ़ने से ब्रांडों ने कीमतों में कटौती कर रहे हैं. कंपनियों का मानना है कि ग्रामीण बाजारों में कुछ सकारात्मक बदलाव के साथ ओवरऑल सुधार हुआ है.
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