सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर हाल ही में हिंडनबर्ग रिसर्च की ओर से जारी एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि उन्होंने एक ऑफशोर फंड में निवेश किया है. ये अंबानी से संबंधित है इसलिए उनके खिलाफ जांच में ढिलाई बरती गई है. इसके अलावा रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाए गए कि मॉरीशस ऐसी शेल कंपनियों को पनाह देता है, जो टैक्स चोरी करते हैं. हालांकि मंगलवार को मॉरीशस के वित्तीय सेवा आयोग (FSC) ने हिंडनबर्ग के तमाम आरोपों को नकार दिया है. आयोग का कहना है कि सेबी प्रमुख के जिस फंड में निवेश की बात कही गई है उसका मॉरीशस से कोई लेना-देना नहीं है.
आयोग ने यह भी साफ किया कि वह शेल कंपनियों को देश में काम करने की इजाजत नहीं देता है. हिंडनबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया कि ‘आईपीई प्लस फंड’ मॉरीशस का एक छोटा विदेशी कोष है और आईपीई प्लस फंड-1 मॉरीशस में रजिस्टर्ड है. इस पर आयोग ने सफाई दी कि आईपीई प्लस फंड और आईपीई प्लस फंड-1 मॉरीशस से जुड़ा नहीं है और इसे कोई लाइसेंस नहीं दिया गया है. मॉरीशस सख्ती से अंतरराष्ट्रीय मानकों के हिसाब से व्यवहार करता है और यह आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के नियमों के अनुरूप है.
सेबी प्रमुख पर क्या लगाए गए आराेप?
हिंडनबर्ग ने शनिवार को आरोप लगाया था कि सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच और उनके पति धवल बुच ने बरमूडा स्थित फंड की मॉरीशस रजिस्टर्ड कंपनी में निवेश किया था. इसमें पैसा लगाने के लिए 2015 में सिंगापुर में उन्होंने एक धन प्रबंधन कंपनी के साथ एक खाता खोला था. मॉरीशस फंड का संचालन अडाणी समूह कर रहा था और इसकी मूल यूनिट का उपयोग दो अडाणी सहयोगियों की ओर से पैसों की हेराफेरी करने एवं शेयर की कीमतें बढ़ाने के लिए किया गया था.
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