
क्रेडिट और जमा वृद्धि दर में लगातार अंतर बढ़ता जा रहा है, ये अब 6 फीसद तक पहुंच चुका है. ऐसे में बैंक जमा राशि बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं. इसके लिए वे कई तरह की रणनीतियां भी अपना रहे हैं. इंवेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी जेफरीज के विश्लेषक प्रखर शर्मा का कहना है कि पारंपरिक व्यावसायिक दृष्टिकोण से ज्यादा धन जुटाने के लिए बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, लेकिन वे इस बार कुछ अलग कर रहे हैं. वे विस्तार नेटवर्क में निवेश के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
एचडीएफसी बैंक अपने जमाकर्ताओं का आधार बढ़ाने के लिए नई शाखाएं खोल रहा है, वहीं कोटक बैंक अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहा है. जेफरीज के मुताबिक एक्सिस वेतन खातों पर फोकस कर रहा है. वहीं इंडसइंड बैंक एनआरआई को लुभा रहा है. प्रखर शर्मा का कहना है कि अर्थव्यवस्था में मंदी जारी है और भारतीय रिज़र्व बैंक मौद्रिक नीति को सख्त करता जा रहा है ऐसे में बैंकों को जमा राशि बढ़ाना जरूरी हो गया है. अभी जमा राशि जहां 12% की दर से बढ़ रही है, तो ऋण 15% की दर से बढ़ रहा है.
एचडीएफसी बैंक ने दो वर्षों में शाखा नेटवर्क में 39% का विस्तार किया है और कोटक महिंद्रा एफडी पर उच्च दरों की पेशकश कर रहा है. वहीं एक्सिस को अमीर ग्राहकों से अधिक जमा मिल रही है, जबकि इंडसइंड बैंक प्रवासी भारतीयों को टारगेट कर रहा है. एक्सपर्ट के अनुसार निजी बैंक पीएसयू बैंकों की तुलना में जमा राशि बढ़ाने के लिए ज्यादा बेहतर ढंग से काम कर रहे हैं, क्योंकि वे विकास को बढ़ावा देने के लिए शाखाओं और प्रोडक्ट का विस्तार कर रहे हैं.
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