सेक्टर-आधारित और थीम-आधारित फंड क्या होते हैं और कौन से फंड में पैसा लगाएं?

सेक्‍टोरल फंड का मतलब ऐसे फंडों से है, जो ऐसे शेयरों में निवेश करते हैं, जो विशेष उद्योग समूह या सेक्‍टर (जैसे फार्मा, बैंकिंग) के भाग होते हैं.

सेक्टर-आधारित और थीम-आधारित फंड क्या होते हैं और कौन से फंड में पैसा लगाएं?
धारणा यह है कि किसी परिसंपत्ति की कोई भी अत्यधिक कीमत अंततः लंबी अवधि में सामान्य हो जाएगी. इसलिए यह कमजोर इच्छा शक्ति वाले निवेशकों के लिए सही विकल्प नहीं है

कुछ वर्ष पहले की तुलना में निवेश की दुनिया में आजकल सेक्टोरल या थीम आधारित प्रोडक्‍ट्स काफी लोकप्रिय होते जा रहे हैं. सेक्टर-आधारित और थीम-आधारित फंड निवेशकों के लिए उपलब्ध एक तरह के इक्विटी म्यूचुअल फंड हैं. ये वैसी स्कीम हैं जो किसी खास थीम या सेक्टर में निवेश करती हैं. ये स्कीम या तो बहुत अच्छे रिटर्न दे सकती हैं या सालों तक नुकसान में रहती हैं. आइए सबसे पहले हम यह समझते हैं कि वे हैं क्या.

क्या होते हैं ये फंड

सेक्टर फंड के मामले में, किसी विशेष उद्योग या क्षेत्र से संबंधित शेयरों में निवेश किया जाता है. थीम-आधारित फंड विभिन्न क्षेत्रों या उद्योगों में निवेश कर सकते हैं लेकिन ऐसे उद्योग अक्सर किसी कॉमन थीम से जुड़े होते हैं.

सेक्‍टोरल फंड

सेक्‍टोरल फंड का मतलब ऐसे फंडों से है जो ऐसे शेयरों में निवेश करते हैं जो विशेष उद्योग समूह या सेक्‍टर (जैसे फार्मा, बैंकिंग, इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर आदि) के भाग होते हैं. सेक्टर-आधारित इक्विटी फंड किसी विशेष उद्योग में ग्रोथ का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं. सेक्टर-आधारित मार्केट पैटर्न अनूठे होते हैं और सही सेक्टर में निवेश से रिटर्न मिल सकता है जो मार्केट रिटर्न की तुलना में बहुत ज़्यादा होता है. अगर निवेशक सही समय पर बाज़ार में एंट्री लेता है तो किसी सेक्टर में निवेश ज़्यादा रिटर्न दे सकता है. सेक्टर-आधारित रिटर्न आम तौर पर साइकिलिकल होते हैं. सेक्टर-आधारित को जोखिम भरा भी माना जाता है क्योंकि रिस्क विभिन्न सेक्टरों में डाइवर्सिफाई नहीं किया जाता है. सही समय पर एंट्री और एग्ज़िट की जानकारी रखने वाले अनुभवी निवेशकों की सलाह के अनुसार इसमें इंवेस्ट करना चाहिए.

थीम-आधारित फंड

थीम-आधारित फंड में सेमी-डायवर्सिफाइड पोर्टफोलियो होता है. ये फंड कई सेक्टरों में निवेश करते हैं जो एक कॉमन थीम से जुड़े होते हैं, जैसे की हाउसिंग, टुरिजम, मेक इन इंडिया इत्यादी. अब हाउसिंग थीमेटिक फंड उन कंपनी में इंवेस्ट करता है जो हाउसिंग थीम का हिस्सा है. इस थीम में सिमेंट कंपनी, पेइंट कंपनी, हाउसिंग फाइनांस कंपनी, स्टील कंपनी और वो सारी कंपनीज आएगी जो हाउसिंग थीम का हिस्सा है. चाहे ये कंपनी अलग अलग सेकटर की क्यों न हो. लेकिन उसकी थीम एक होगी. हाउसिंग थीमेटिक फंड इस सेकटर की सारी कंपनीज का एनालिसिस करेगा और उसमें से जो कंपनी उसे अच्छी लगती है उसमें इंवेस्ट करेगा. यानी वो हाउसिंग थीमेटीक फंड का कुछ हिस्सा सिमेन्ट कंपनी, कुछ हिस्सा पेइंट कंपनी इंवेस्ट करेंगे. इस प्रकार का इंवेस्टमेंट रिस्की होता है यानी अगर हाउसिंग की थीम चल गइ तो आपको फायदा होगा वरना नुकसान. इसलिए थीमेटीक इंवेस्टमेंट एक हाइ रिस्क और हाइ रिवोर्ड इंवेस्टमेंट होता है.

थीम-आधारित म्यूचुअल फंड लंबी अवधि में अच्छा रिटर्न देने के लिए जाने जाते हैं. वे बाजार में उभरते रुझानों को पहचान कर उनमें निवेश करने की रणनीति बनाते हैं. इसलिए, जिन निवेशकों को फायदेमंद रुझानों की पहचान करने का अनुभव है, वे दीर्घकालिक निवेश के लिए थीम-आधारित फंड पर भरोसा कर सकते हैं.

सर्टिफाइड फाइनांसियल प्लानर बिरजु आाचार्य बताते हैं की ये हाइ रिस्क, हाइ रिटर्न फंड होते हैं. जैसे हम इक्विटी मार्केट के लिए ये कहते हैं की इसमें कमसे कम 3 से 5 साल के लिए निवेश करना चाहिए जबकी थीमटीक और सेक्टोरियल फंड में 5 से 7 साल के लिए निवेश करना चाहिए. जैसे फार्मा सेक्टर ने 2010 में और 2020 में अच्छा रिटर्न दिया और अब रियल एस्टेट और ओटो सेकटर अच्छे लग रहे हैं. आचार्य आगे बताते हैं की सेक्टोरियल और थीमेटिक फंड इकोनोमी के साथ जुडे हुए फंड हैं. भविष्य में कौन सा सेकटर अच्छा पर्फोर्म करेगा उसका किसी को पता नहीं. क्योंकी हर एक सेकटर की एक सायकल है.

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