म्यूचुअल फंड SIP शुरू करना चाहते हैं तो आपको इन 5 गलतियां करने से रहना होगा दूर

कई लोग सिर्फ 1 साल के रिटर्न के आधार पर म्यूचुअल फंड को पसंद करने की गलती करते हैं. आपको 3, 5 और 10 साल में फंड के प्रदर्शन को देखना चाहिए.

  • Vijay Parmar
  • Publish Date - September 11, 2021 / 03:11 PM IST
म्यूचुअल फंड SIP शुरू करना चाहते हैं तो आपको इन 5 गलतियां करने से रहना होगा दूर
इनकम क्लबिंग के जरिए यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी करदाता अपनी आमदनी को अपने परिवार के सदस्य के बीच बांटकर करदेयताओं से बच न पाए.

Mistakes in Mutual Fund SIP: पिछले एक साल में म्यूचुअल फंड में निवेशकों की संख्या में बहुत ज्यादा उछाल आया हैं. बाजार में चल रही तेजी ने कई निवेशकों को अपनी ओर खींचा हैं, यदि आप भी किसी म्यूचुअल फंड स्कीम में SIP के जरिए निवेश करना चाहते हैं तो आपको कुछ बातों को ध्यान में रखना होगा. म्यूचुअल फंड में SIP निवेश करने के मामले में निवेशक कुछ गलतियां करते हैं जिससे आपको दूर रहना चाहिए. SIP कोई रॉकेट साइंस नहीं है. यह एक पद्धति है जो आपके लिए शायद उबाऊ है लेकिन संपत्ति सर्जन का विश्वसनीय तरीका हैं.

SIP निवेश की राशि तय करने में गलती

SIP के जरिए निवेश करने के लिए अमाउंट तय करने में कई लोग गलती करते हैं. ज्यादातर लोग उनके पास उपलब्ध सरप्लस राशि के आधार पर अपनी SIP राशि तय करते हैं. यदि आप अपना SIP शुरू करने के लिए पर्याप्त सरप्लस अमाउंट इकट्ठा होने तक प्रतीक्षा करते रहेंगे, तो कभी निवेश की शुरुआत नहीं कर पाएंगे. आपको यह सोचना होगा कि, आप अपनी आय से कितनी बचत कर सकते हैं और अपने दीर्घकालिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कितनी लंबी अवधि तक निवेश कर सकते हैं.

सिर्फ एक साल का रिटर्न देखने की गलती

मान लीजिए, आप मिड-केप फंड में निवेश करना चाहते हैं और आपने इस केटेगरी की विभिन्न स्कीम के बारे में पता किया हैं. आपके सामने एक स्कीम हैं जिसने एक साल में 17% और दूसरी स्कीम ने 14% रिटर्न दिया हैं, तो बेशक आप अधिक रिटर्न देने वाली स्कीम को ही चुनेंगे. यह एक बडी गलती हैं, क्योंकि आपको सिर्फ 1 साल के रिटर्न को आधार नहीं बनाना चाहिए. आपको यह भी देखना चाहिए कि, क्या स्कीम ने लगातार अच्छा रिटर्न दिया हैं. यदि आप टाइमिंग जोखिम से बचना चाहते हैं, तो उन फंडों में SIPs करें जो लगातार रिटर्न देते हैं.

NAV के आधार पर फंड पसंद करने की गलती

कई निवेशक फंड को पसंद करने से पहले उसकी NAV देखते हैं और कम NAV वाले फंड को किफायती मान लेते हैं. फंड के अच्छे या बुरे होने को NAV से कोई संबंध नहीं हैं. यदि मार्केट 20% कम होने पर आपने किसी इक्विटी फंड में निवेश किया हैं, तो आपको अच्छा रिटर्न मिलने की संभावना बढ जाती हैं, भले ही फंड NAV 24 रुपये हो या 240 रुपये. वास्तव में, कम NAV वाले फंड या तो बुरी तरह से प्रबंधित हो सकते हैं या बहुत अधिक जोखिम लेने वाले हो सकते हैं. इसलिए, किसी फंड को उसके NAV से नहीं आंकना बेहतर है.

नियमित आय प्राप्त करने के लिए डिविडेंड प्लान को चुनने की गलती

डिविडेंड प्लान के खिलाफ 2 तर्क हैं. सबसे पहले, डिविडेंड योजनाएं रिटर्न को संयोजित नहीं करती हैं और संपत्ति सर्जन के मूल उद्देश्य को विफल करती हैं. दूसरे, डिविडेंड योजनाएं कर-अक्षम हैं. डिविडेंड पर वर्तमान में आपकी वृद्धिशील आय-कर दर पर टैक्स लगाया जाता है. दूसरी ओर, लंबी अवधि के लाभ पर प्रति वर्ष 1 लाख रुपये से अधिक लाभ पर सिर्फ 10% कर लगाया जाता है, जबकि अल्पकालिक लाभ पर भी 15% की रियायती दर पर कर लगाया जाता है. आप पिछले 8 वर्षों के नुकसान की भरपाई करके अपने करों को और कम कर सकते हैं. यदि आप नियमित आय चाहते हैं, तो ग्रोथ स्कीम में एक सिस्टेमेटिक विथ्ड्रोअल प्लान (SWP) का विकल्प चुनना चाहिए.

बाजार में करेक्शन के वक्त SIP को रोकने की गलती

यह एक सामान्य गलती है. SIP से आपको रुपी-कॉस्ट एवरेज करने का मौका मिलता हैं. जब बाजार में गिरावट होती है, तो आपको अधिक युनिट मिलते हैं, इसलिए यह आपके लिए होल्डिंग की लागत को कम करने का सुनहरा अवसर है. वास्तव में, SIP पर सबसे अच्छा रिटर्न तब प्राप्त होता है जब आप मंदी में बाजार में टिके रहते हैं.

हमें फॉलो करें

(मार्केट अपडेट और जाने अमीर कैसे बने सिर्फ आपके Money9 हिंदी पर)

लेटेस्ट वीडियो

Money9 विशेष