जानिए क्या है टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड? निवेशक क्यों इसे दे रहे प्राथमिकता

एम्फी के आंकड़ों से पता चलता है कि एफएमपी के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मार्च 2020 में 1.4 ट्रिलियन रुपये से अगस्त 2021 में 53,286 करोड़ रुपये हो गए है

जानिए क्या है टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड? निवेशक क्यों इसे दे रहे प्राथमिकता
आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एमएफ और एडलवाइस एमएफ सहित फंड हाउस ने इस तरह के टारगेट मैच्योरिटी फंड लॉन्च किए हैं

Investments: फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (FMPs), क्लोज-एंडेड डेट म्यूचुअल फंड स्कीम्स के विकल्प के रूप में टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड उभरे हैं. कुछ साल पहले तक FMPs और क्लोज-एंडेड डेट म्यूचुअल फंड स्कीम्स बेहद लोकप्रिय थीं. हाल के हफ्तों में, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एमएफ, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एमएफ और एडलवाइस एमएफ सहित फंड हाउस ने इस तरह के टारगेट मैच्योरिटी फंड लॉन्च किए हैं.

क्या है टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड?

अन्य पैसिव फंडों की तरह, टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड डेट फंड होते हैं जिनकी एक स्पेसिफिक मैच्योरिटी डेट होती है, जो कि उनके पोर्टफोलियो में मौजूद बॉन्ड की एक्सपायरी डेट के साथ अलाइन होती है (target maturity index funds replicate the composition of the underlying index and have specific maturity dates aligned to the expiry date of underlying bonds). ये फंड तुलनात्मक रूप से लोअर इंटरेस्ट रेट रिस्क और अधिक प्रिडिक्टिव और स्टेबल रिटर्न प्रदान करते हैं, जो उन निवेशकों के लिए उपयुक्त है जो बैंक जमा की तरह रिटर्न की प्रिडिक्टिबिलिटी पसंद करते हैं.

उदाहरण के लिए, एडलवाइस निफ्टी पीएसयू बॉन्ड प्लस एसडीएल इंडेक्स फंड 30 अप्रैल 2027 को मैच्योर होगा और मैच्योरिटी डेट के बाद निवेशकों को मैच्योरिटी प्रोसीड डिस्ट्रीब्यूट करेगा. मैच्योरिटी प्रोसीड वह राशि है जो आपको चयनित अवधि के कार्यकाल के पूरा होने पर एक फिक्स्ड / टर्म / रेकरिंग डिपॉजिट के निवेशक के रूप में भुगतान की जाएगी.

फंडों की सबसे अच्छी श्रेणी

कॉरपोरेट ट्रेनर-डेट जॉयदीप सेन के हवाले से बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा, ‘बाजार से संबंधित अस्थिरता से बचने के लिए यह फंडों की सबसे अच्छी श्रेणी है. इस तरह के फंडों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अगर निवेशक मैच्योरिटी तक होल्ड करते हैं तो मार्क टू-मार्केट वोलैटिलिटी नहीं होती. ये फंड स्टेट डेवलपमेंट लोन (एसडीएल), सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) और सरकारी प्रतिभूतियों की ओर से जारी किए गए विभिन्न डेट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं. टारगेट मैच्योरिटी फंड या तो इंडेक्स फंड या एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) हो सकते हैं.

इंडस्ट्री प्लेयर्स का कहना है कि टारगेट मैच्योरिटी इंडेक्स फंड FMPs के समान हैं, लेकिन वे क्लोज-एंडेड नेचर के नहीं हैं और निवेशक किसी भी समय अपनी यूनिट खरीद और बेच सकते हैं. भले ही एफएमपी एक्सचेंजों में लिस्टेड हैं, लेकिन लिक्विडिटी कम होने की वजह से इससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है.

लिक्विडिटी के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं

जॉयदीप सेन ने कहा, ‘अब, इंडेक्स फंड में, निवेशकों को लिक्विडिटी के बारे में चिंता करने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि वे इसे फंड हाउस से खरीदते और बेचते हैं. ईटीएफ में भी लिक्विडिटी होती है, जिससे निवेशकों को किसी तरह की दिक्कत न हो. अधिक से अधिक लोग एफएमपी से टारगेट मैच्योरिटी फंड्स की ओर बढ़ रहे हैं और एफएमपी के एसेट घट रहे हैं.’ एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के आंकड़ों से पता चलता है कि एफएमपी के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) मार्च 2020 में 1.4 ट्रिलियन रुपये से अगस्त 2021 में 53,286 करोड़ रुपये हो गए हैं.

टॉप रेटेड सिक्योरिटीज में निवेश

टारगेट मैच्योरिटी डेट फंड का एक और बड़ा फायदा यह है कि वे टॉप रेटेड सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं और ऐसी स्कीम्स में लगभग कोई क्रेडिट रिस्क नहीं होता है. आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी के एमडी और सीईओ ए बालासुब्रमण्यम के हवाले से बिजनेस स्टैंडर्ड ने लिखा, पैसिव डेट प्रोडक्ट ट्रेडिशनल सेविंग इंस्ट्रूमेंट की सिम्प्लिसिटी के साथ रिटर्न की प्रिडिक्टिबिलिटी को कंबाइन करते हैं.

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