घर खरीदने जा रहे हैं तो इन खर्चों की कर लें पड़ताल, ये टिप्स आएंगी काम

घर खरीद में छिपे हुए खर्च: अगर आप भी किसी प्रॉपर्टी की तलाश में हैं तो आपको प्रॉपर्टी के मूल्य के साथ और भी कई खर्चों को ध्यान में रखना चाहिए.

घर खरीदने जा रहे हैं तो इन खर्चों की कर लें पड़ताल, ये टिप्स आएंगी काम
कई प्रोजेक्ट के ठेकेदारों ने भुगतान न मिलने के चलते दी काम बंद करने की धमकी. (Pixabay)

Home buying costs:  इन दिनों घर बिक्री में कुछ उछाल दिख रहा है और आने वाले महीनों में कोविड-19 का डर कम होते ही इसमें वृद्धि होना तय है. रियल एस्टेट कंसल्टेंसी एनारॉक ने हाल ही में कहा है कि 2021 की दूसरी तिमाही में 7 शहरों में लगभग 24,570 घरों के बिक्री का अंदाज है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की बिक्री से 93% ज्यादा है.

अगर आप भी किसी प्रॉपर्टी की तलाश में हैं तो आपको प्रॉपर्टी के मूल्य के साथ और भी कई खर्चों को ध्यान में रखना चाहिए. इसलिए, आपको अपने फंड के सही इस्तेमाल पर ध्यान देना जरूरी है.

यहां कुछ लागतें हैं जो खरीदारों को घर खरीदते समय चुकानी पड़ती हैं.

कानूनी खर्चे

घर खरीदार अक्सर उन खर्चों पर ध्यान नहीं देता है जिन्हें कानूनी जरूरतों के कारण करना चुकाना पड़ता है. इनमें स्टैंप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और ट्रांसफर फीस शामिल है.

स्टैंप ड्यूटी घर की कीमत पर तय की जाती है. सरकार द्वारा निर्धारित रेडी रेकनर मूल्य (सर्कल रेट) या लेनदेन मूल्य, जो भी अधिक हो, उस पर स्टैंप ड्यूटी का भुगतान किया जाना चाहिए. पंजीकरण की लागत आमतौर पर खरीदार द्वारा सरकार को देय एक निश्चित राशि होती है.

यदि आप किसी हाउसिंग बोर्ड या राज्य हाउसिंग कॉरपोरेशन द्वारा बनाई संपत्ति खरीद रहे हैं या किसी सरकारी निकाय द्वारा लीज पर ली गई जमीन पर खरीद रहे हैं, तो आपको ट्रांसफर शुल्क देना पड़ सकता है. संपत्ति की न केवल रजिस्ट्री कराना जरूरी है, बल्कि हस्तांतरण को अधिकारियों के रजिस्टर में दर्ज करने की भी आवश्यकता है.

अगर आप हाउसिंग बोर्ड या ऊपर बताए गए किसी ऐसे प्राधिकरण द्वारा निर्मित संपत्ति खरीद रहे हैं, तो ऐसे प्राधिकरण से NOC लेना जरूरी है. साथ ही इससे जुड़ी फीस को भरना भी जरूरी है.

होम लोन के छिपे खर्च

अगर आप होम लोन ले रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ दूसरे खर्चे भी हो सकते हैं जो हो सकता है कि आपको बाद में पता चलें.

लोन चुकाने की लागत के साथ-साथ आपको प्रोसेसिंग शुल्क का भुगतान करना होता है. इसमें स्ट्रक्चरल ऑडिट की लागत, कानूनी दस्तावेज के लिए होने वाला खर्च और अन्य लागतें शामिल हैं.  हालांकि, कई दफा बैंक इन खर्चों में आपको छूट भी देते हैं.

इसके साथ ही बैंक अपनी लोन की रकम को सुरक्षित करने के लिए एक टर्म लाइफ इंश्योरेंस और होम इंश्योरेंस लेने पर जोर दे सकता है. प्रीमियम भुगतान आपको वहन करना होगा. कभी-कभी बैंक प्रीमियम की रकम को होम लोन अमाउंट में जोड़ देता है और उसी हिसाब से समान मासिक किस्त (EMI) का आकलन करता है.

ब्रोकरेज

अक्सर रियल्टी के सौदों में ब्रोकर्स भी शामिल होते हैं. ब्रोकर के जरिए फ्लैट या घर खरीदने पर दस्तावेज तैयार करने, लोन लेने जैसे कई काम आसान हो जाते हैं. ऐसे में अगर आप भी किसी ब्रोकर के जरिए सौदा कर रहे हैं तो आपको ब्रोकरेज चार्ज देने के लिए भी तैयार रहना चाहिए.

आमतौर पर ब्रोकरेज चार्ज फ्लैट की कीमत का आधा फीसदी (0.50%) से 1 फीसदी तक होता है. इस चार्ज पर आपको ब्रोकर के साथ पहले ही चर्चा कर लेनी चाहिए ताकि बाद में कोई विवाद न हो.

इसके अलावा, अगर आप टाइटल की कानूनी हैसियत जानने के लिए किसी कानूनी फर्म की सेवाओं को लेना चाहते हैं, तो इसके लिए भी आपको अलग से पैसे खर्च करने होंगे.

गृहप्रवेश

इस तरह की लागतों को आमतौर पर घर खरीदार द्वारा शामिल नहीं किया जाता है. हालांकि, अगर आप एक ही शहर में दूसरी जगह पर शिफ्ट हो रहे हैं तो ये खर्च ज्यादा बड़ा नहीं होगा. लेकिन, अगर आप किसी दूसरे शहर में जा रहे हैं तो शिफ्टिंग का खर्च भी अच्छा-खासा बैठ सकता है.

मूवर्स और पैकर्स की सर्विसेज के साथ आपको सामान को नए घर पर व्यवस्थित करने में भी आपको इनकी जरूरत हो सकती है.

यदि आप प्री-ओन्ड घर में जा रहे हैं तो आपको सभी  सेवाओं को ट्रांसफर कराना होगा और इसके लिए भी आपको पैसे खर्च करने होंगे.

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