कोविड -19 महामारी ने सिखाया है कि हम फाइनेंशियल मामलों में कोई भी लापरवाही न बरतें. वहीं हम सभी के लिए एक इमरजेंसी फंड बनाना बहुत जरूरी है. Money9 ने कुछ लोगों से उनके संघर्षों को समझने के लिए बात की,उन्होंने बताया कि कैसे वह अपनी फाइनेंशियल लाइफ पर महामारी के प्रभाव का मुकाबला करने में कामयाब रहे. इन्हीं लोगों के अनुभवों के आधार पर हम आपको ऐसी 6 बातों के बारे में बताने जा रहे हैं जो किसी भी व्यक्ति की फाइनेंशियल कंडीशन को बताएगी.
एक सामान्य नियम के मुताबिक इमरजेंसी फंड में आपके चार से छह महीने का खर्च शामिल होने चाहिए. सैलरी मिलने पर आपको सेविंग अकाउंट या लिक्विड फंड जैसे सेविंग ऑप्शन में एक फिक्स अमाउंट डालना चाहिए. यह आपको बुरे दौर से पार लगाने में मदद करेगा.
कोलकाता के एक सॉफ्टवेयर पेशेवर बिटन बोस (बदला हुआ नाम) ने पिछले साल अपनी नौकरी खो दी थी. छह महीने तक संघर्ष करने के बाद आखिरकार उन्हें नौकरी मिल गई. उन्होंने कहा कि अपने महीने में होने वाले खर्च की प्लानिंग करना सबसे ज्यादा जरूरी है. अपने खर्चों को ठीक करने के बाद इन्वेस्ट करना चाहिए. बजट तैयार करने की कोशिश करें. जब तक आपके पास बजट नहीं होगा, आप अपने खर्चे नियंत्रित नहीं कर पाएंगे. एक बजट बस यह दिखाता है कि आपके पास कितना पैसा आ रहा है और उन फंडों को कैसे खर्च किया गया है.
ज्यादा खर्च से बचने के लिए डिपार्टमेंटल स्टोर जाने से पहले सामान की लिस्ट बना लें. वीक में एक दिन ऐसा भी तय कर सकते हैं जिस दिन आप खर्चे न करें.
सेविंग और इन्वेस्टमेंट को न मिलाएं. सेविंग पैसों को अलग रखने के बारे में है. वहीं इन्वेस्ट करते समय पैसा लगाना या संपत्ति खरीदना, जैसे स्टॉक, बॉन्ड, म्यूचुअल फंड आदि अपने पैसे को बढ़ाने के लिए है. अगर आप ज्यादा जोखिम लेना चाहते हैं तो इक्विटी और इक्विटी लिंक्ड म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करें. म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय, निवेश के लिए सही फंड चुनने के बारे में ध्यान रखना जरूरी है. सुरक्षित रिटर्न के लिए कोई भी सरकारी बॉन्ड में निवेश कर सकता है, लेकिन पहले अपना लक्ष्य तय करना होगा.
कोविड -19 ने हमें जीवन में अचानक आने वाली समस्याओं के बारे में एहसास कराया है. इसलिए, अपनी और पेरेंट्स की फाइनेंशियल रूप से रक्षा करना एक अच्छा निर्णय है. आपको टर्म इंश्योरेंस और हेल्थ इंश्योयरेंस स्कीम में निवेश करना चाहिए. किसी भी स्कीम में इन्वेस्ट करने से पहले किसी फाइनेंशियल एडवाजर से बात करना अच्छा रहेगा.
एजूकेशनल इंस्टीटयूट में काम करने वाली पल्लवी घोष रॉय को कठिन समय का सामना करना पड़ा था. ऐसे में जरूरी है कि आप अपने टैक्स और कटौती की प्लानिंग करें. टैक्स कटौती के लिए सबसे बड़ा पूल सेक्शन 80सी है. इस धारा के तहत, आप विभिन्न निवेश और व्यय करने के लिए 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का दावा कर सकते हैं. साथ ही, अपने और फैमिली की हेल्थ इंशयोरेंस पॉलिसी के लिए भुगतान की गई प्रीमियम राशि के लिए धारा 80डी के तहत कटौती का दावा कर सकते हैं
रिटायरमेंट लाइफ इस बात पर निर्भर करती है कि आपने इसके लिए कैसे योजना बनाई है. रिटायरमेंट के लिए फाइनेंस का प्लान बनाना दो स्टेप्स वाली प्रोसेस है. पहला, रिटायरमेंट के लिए सेविंग और दूसरा है रिटायरमेंट के दौरान अपने एसेट से इनकम जेनरेट करना. रिटायरमेंट की अवधि के दौरान रिटायरमेंट फंड और इनकम का निर्माण दो महत्वपूर्ण चीजें हैं. आपको अपने कैरियर के पहले दिन से ही इन दोनों की योजना बनानी होगी. एनपीएस, पीपीएफ और ईपीएफ में छोटे लेकिन नियमित योगदान से मोटी रकम मिलती है. सही निवेश करने से यह सुनिश्चित होगा कि जब तक आप जीवित रहेंगे तब तक आपकी एक फिक्स इनकम होगी.
आपके भविष्य के लिए छोटी फाइनेंशियल प्लानिंग जरूरी है. कोई भी कदम उठाने से पहले एक्सपर्ट्स से बात कर सलाह लेनी चाहिए. ऐसा नहीं करने पर आपको परेशानी हो सकती है. आपकी मेहनत की कमाई को ध्यान देने और संभालने की जरूरत है.
पर्सनल फाइनेंस पर ताजा अपडेट के लिए Money9 App डाउनलोड करें।