क्रिप्टो को माना जाएगा वस्तु, विधेयक लाने की योजना बना रही सरकार

Cryptocurrencies: सरकार के इस नए बिल में क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित संपत्तियों के टैक्स की रूपरेखा तैयार करने की उम्मीद है.

  • Money9 Hindi
  • Publish Date - September 3, 2021 / 04:09 PM IST
क्रिप्टो को माना जाएगा वस्तु, विधेयक लाने की योजना बना रही सरकार
IMAGE: PBNS, एक्सपर्ट्स का कहना है कि छोटे शहरों में क्रिप्टोकरेंसी की ग्रोथ को बढ़ावा देने वाले मुख्य कारणों में सोशल मीडिया और प्रभावशाली मार्केटिंग शामिल हैं.

Cryptocurrencies को लेकर सरकार एक नए ड्राफ्ट बिल में इसे परिभाषित करने की योजना बना रही है. इकोनॉमिक टाइम्स की Cryptocurrencies एक रिपोर्ट के मुताबिक क्रिप्टोकरेंसी को सभी उद्देश्यों के लिए एक एसेट या वस्तु के रूप में माना जाएगा. यह पहली बार होगा जब क्रिप्टोकरेंसी को उपयोगकर्ता द्वारा उपयोग की जाने वाली तकनीक के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा.

सरकार तैयार कर रही है टैक्स की रूपरेखा

सूत्रों के मुताबिक सरकार के इस नए बिल में क्रिप्टोकरेंसी से संबंधित संपत्तियों के टैक्स की रूपरेखा तैयार करने की उम्मीद है, ताकि इसे टैक्स नियमों के हिसाब से स्पष्ट रूप से वर्गीकृत किया जा सके.

सरकार का ध्यान नियामक (regulatory) उद्देश्यों के लिए संपत्ति के अंतिम उपयोग पर आधारित होगा. इस बिल में सरकार विभिन्न उपयोग के मामलों में क्रिप्टोकरेंसी और उसके समाधान को लेकर एक नए दिशा में काम कर रही है, ताकि इस पर सही तरीके से टैक्स लगाया जा सके. टैक्स को लेकर क्रिप्टोकरेंसी मुद्रा है या वस्तु स्थिति फिलहाल स्पष्ट नहीं है.

क्रिप्टोकरेंसी को परिभाषित करना जरूरी

क्रिप्टोकरेंसी के मौजूदा नियमों में बहुत सी खामियां हैं, क्योंकि जब तक किसी संपत्ति को परिभाषित नहीं किया जाता तब तक उस पर टैक्स लगाने को लेकर अस्पष्टता बनी रहेगी.

करीबी सूत्रों के मुताबिक सरकार पहले क्रिप्टोकरेंसी को परिभाषित करना चाह रही है. क्रिप्टो परिसंपत्तियों को या तो उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली तकनीक के आधार पर वर्गीकृत किया जा सकता है या उन्हें उनके अंतिम उपयोग पर परिभाषित किया जा सकता है.

इसलिए, इस बारे में बात करने से पहले कि नियमों को कैसे काम करना चाहिए, सरकार को यह बताना होगा कि क्रिप्टोकरेंसी की परिभाषा क्या है, क्रिप्टोकरेंसी का मतलब क्या है.

क्रिप्टोकरेंसी क्या एक डिजिटल करेंसी है?

इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक क्रिप्टो एक्सचेंजों ने क्रिप्टोकरेंसी को विनियमित करने के लिए नीतिगत सिफारिशें की थीं, जिसमें क्रिप्टोकरेंसी को डिजिटल संपत्ति के रूप में परिभाषित करना और घरेलू एक्सचेंजों को रजिस्टर्ड करने के लिए एक प्रणाली शुरू करना शामिल था.

क्रिप्टो एक्सचेंजों ने सुझाव दिया था कि भारत में क्रिप्टो टोकन को कैरेंसी के बजाय डिजिटल संपत्ति के रूप में पहचानने की जरूरत है.

लॉ फर्म निशीथ देसाई एसोसिएट्स के लीडर जयदीप रेड्डी ने बताया कि मौजूदा समय में 5,000 से अधिक विभिन्न क्रिप्टोकरेंसी हैं जिनमें से प्रत्येक की अपनी अलग कानूनी विशेषताएं हैं.

इसलिए नए कानून को किसी विशेष टोकन के अंतिम उपयोग या गतिविधि के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए.

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