वित्त मंत्रालय ने बताया कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड स्कीम 2021-22 की अगली किश्त के लिए इश्यू प्राइस 4,765 रुपये प्रति ग्राम तय किया गया है.
इक्विटी ETFs में 1 साल, जबकि नॉन-इक्विटी ETFsमें 3 साल की अवधि को शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन के तहत गिनती में लिया जाता है.
अगर कॉर्पस 2.5 लाख रुपये के बराबर या उससे कम है तो सब्सक्राइबर को पूरी रकम एकमुश्त दी जाएगी.
बुल मार्केट की शुरुआत तब हुई, जब महामारी की आशंकाओं के कारण मार्केट निचले स्तर पर पहुंच गया था.
खरीदारी करने के लिए क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते समय और लोन का भुगतान करते समय आपको इन बातों का ध्यान जरूर रखना चाहिए.
NSE और SGX के बीच नई व्यवस्था निवेशकों को भारतीय शेयरों और इंडेक्स के आधार पर ट्रेडिंग करने की अनुमति देगी.
एकमुश्त मैच्योरिटी पर एक गारंटीड राशि प्रदान करते हैं. बशर्ते सभी प्रीमियम का भुगतान किया जाता है और इंश्योर्ड व्यक्ति पॉलिसी अवधि तक जिंदा रहता है.
हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों के नेटवर्क का और विस्तार होगा और उसमें अस्पताल और क्लीनिक शामिल होते जाएंगे.
इन्वेस्ट करते समय फंड के ग्रोथ पोटेंशियल को समझने के लिए प्राइज-टू-इक्विटी रेश्यो देखें.
यहां तीन बेहतरीन सिक्योर्ड लोन के ऑप्शन्स दिए गए हैं, जो फंड के आखिरी इस्तेमाल पर बिना किसी प्रतिबंधों के आते हैं.