टाटा मोटर्स के बोर्ड ने सोमवार को कंपनी के व्यवसाय के संचालन को दो अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों यानी वाणिज्यिक वाहनों और यात्री वाहन व्यवसाय में विभाजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. वाहन कारोबार के ग्रोथ में तेजी लाने के मकसद से कंपनी ने यह फैसला लिया है. कंपनी की ओर से शेयर बाजारों को दी गई जानकारी के मुताबिक डिमर्जर से वाणिज्यिक वाहन और यात्री वाहन कारोबार संबंधित रणनीतियों को आगे बढ़ाने के लिए सशक्त होंगे. डिमर्जर के बाद एक इकाई में वाणिज्यिक वाहन व्यवसाय और उससे संबंधित निवेश होंगे.
शेयरधारकों की नई लिस्टेड कंपनियों में समान हिस्सेदारी होगी
वहीं दूसरी इकाई में यात्री वाहन, इलेक्ट्रिक वाहन, जगुआर, लैंड रोवर सहित यात्री वाहन व्यवसाय और इससे संबंधित निवेश रहेंगे. कंपनी ने कहा है कि एनसीएलटी व्यवस्था योजना के माध्यम से डिमर्जर को लागू किया जाएगा. टाटा मोटर्स के सभी शेयरधारकों के पास दोनों लिस्टेड कंपनियों में समान हिस्सेदारी बनी रहेगी. मतलब यह है कि जिन निवेशकों के पास टाटा मोटर्स के शेयर हैं उन्हें दोनों लिस्टेड कंपनियों के शेयर बराबर मात्रा में मिलेंगे. जानकारी के मुताबिक डीमर्जर को मंजूरी मिलने में 12-15 महीने का समय और लग सकता है.
डिमर्जर से कामकाज पर नहीं पड़ेगा असर
कंपनी का कहना है कि डिमर्जर की वजह से कर्मचारियों, कस्टमर्स और कारोबारी सहयोगियों के कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा. टाटा मोटर्स के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के मुताबिक टाटा मोटर्स ने पिछले कुछ वर्षों में एक मजबूत बदलाव की पटकथा लिखी है. उनका कहना है कि तीन ऑटोमोटिव व्यवसाय इकाइयां अब स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं और लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. डिमर्जर से हमारे कर्मचारियों के लिए बेहतर विकास की संभावनाएं और हमारे शेयरधारकों के लिए वैल्यू में बढ़ोतरी होगी. उन्होंने कहा कि इस डिमर्जर से कंपनी को अपना फोकस और चुस्ती को बढ़ाकर बाजार में मौजूद अवसरों को बेहतर ढंग से भुनाने में मदद मिलेगी.
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