मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटरों में सुधार, RBI कर सकता है कुछ सरप्लस कैश को अवशोषित

RBI: मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटरों में सुधार के साथ केंद्रीय बैंक दरों के कम रखते हुए तरलता पर बेहतर पकड़ रखना पसंद कर सकता है.

मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटरों में सुधार, RBI कर सकता है कुछ सरप्लस कैश को अवशोषित
SOURCE, PIXABAY: एमपीसी की अगली मीटिंग 6 से 8 अक्टूबर, 2021 को होनी है. पिछले हफ्ते, आरबीआई ने सात-दिवसीय रिवर्स रेपो कट ऑफ को 3.99% पर तय करके बाजारों को चौंका दिया था, जो कि अपेक्षा से अधिक था और 4% के पॉलिसी रेट के बहुत करीब थी.

RBI: जब ब्याज दरों की बात आती है तो आरबीआई (RBI) से एक अलग रणनीति (divergent strategy) का पालन करने की उम्मीद की जाती है. ब्याज दरें फिलहाल हिस्टोरिक लो (historic low) पर हैं और RBI बैंकिंग सिस्टम में अधिशेष तरलता (surplus liquidity) के 10 लाख करोड़ रुपये से डील कर रहा है. महामारी के जवाब में, केंद्रीय बैंक ने (रेपो) रेट को कम कर 4% कर दिया था. RBI ने ऐसा यह सुनिश्चित करने के लिए किया था कि बैंक लोन देते रहें. RBI ने बैंकों को फंड की किसी तरह की कोई कमी भी नहीं होने दी.

तरलता पर बेहतर पकड़ चाहता है RBI

TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक अब मैक्रोइकॉनॉमिक इंडिकेटरों में सुधार के साथ केंद्रीय बैंक दरों के कम रखते हुए तरलता पर बेहतर पकड़ रखना पसंद कर सकता है.
बैंक अपने विचार में एकमत हैं कि केंद्रीय बैंक यथास्थिति की नीति अपनाएगा और रेपो दर को 4% पर जारी रखेगा.
हालांकि, कई लोग अब इस विचार के प्रति आकर्षित हो रहे हैं कि केंद्रीय बैंक कुछ अधिशेष तरलता को महामारी प्रोत्साहन के नॉर्मलाइजेशन को शुरू करने के लिए अवशोषित कर सकता है जो इधर-उधर फ्लोट कर रही है.

बाजारों को RBI ने चौंकाया

एमपीसी की अगली मीटिंग 6 से 8 अक्टूबर, 2021 को होनी है. पिछले हफ्ते, आरबीआई ने सात-दिवसीय रिवर्स रेपो कट ऑफ को 3.99% पर तय करके बाजारों को चौंका दिया था, जो कि अपेक्षा से अधिक था और 4% के पॉलिसी रेट के बहुत करीब थी.
आरबीआई के इस कदम से सिटी ग्रुप ने अनुमान लगाया कि केंद्रीय बैंक अगले सप्ताह अपनी रिवर्स रेपो दर में वृद्धि करेगा (जिस दर पर आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों से उधार लेता है).

यदि ऐसा होता है, तो आरबीआई कोविड के दौरान इमरजेंसी उपायों को वापस लेने का संकेत देने वाला पहला केंद्रीय बैंक होगा.

 

तरलता में कमी से नहीं आएगा कोई बदलाव

तरलता में कमी से टॉप रेटेड बॉरोअर्स में बदलाव आने की उम्मीद नहीं है. यह भी संभावना नहीं है कि कोई ऋणदाता होम लोन दरों से छेड़छाड़ करेगा, जिसे सबसे सुरक्षित लोन के रूप में देखा जाता है.
हालांकि, टॉप रेटेड और लोअर रेटेड बॉरोअर्स के भुगतान के बीच का अंतर बढ़ सकता है. रिटेल बॉरोअर्स के लिए अच्छी खबर यह है कि त्योहारों के दौरान जब घर खरीदने में तेजी आई तो बैंकों ने बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए पिछले हफ्ते दरों में कटौती की है.
लेंडर्स के ग्रोथ के लिए उत्सुक होने का कारण यह है कि कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट साइकिल ने अभी तक पिक अप नहीं किया है.

हमें फॉलो करें

(मार्केट अपडेट और जाने अमीर कैसे बने सिर्फ आपके Money9 हिंदी पर)

लेटेस्ट वीडियो

Money9 विशेष