ATM ट्रांजैक्शन पूरा नहींं हो पाने पर भी कट गए पैसे? यहां जानें रिकवरी की प्रक्रिया

ट्रांजैक्शन फेल होने पर ग्राहक को कोई शिकायत दर्ज नहीं करानी होती है. RBI के नियमों के मुताबिक, बैंकों को खुद 5 दिन में पैसे लौटाने होते हैं

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ATM से पैसे निकालने में दिक्कतों का सामना लगभग हम सभी ने किया होगा. इसे आम तौर पर टेक्निकल ग्लिच कहा जाता है. हालांकि, कई बार ऐसा भी होता है कि फिजिकल ग्लिच के बावजूद अकाउंट से पैसे कट जाते हैं और हाथ एक रुपया नहीं आता.
ATM से पैसे निकालने में दिक्कतों का सामना लगभग हम सभी ने किया होगा. इसे आम तौर पर टेक्निकल ग्लिच कहा जाता है. हालांकि, कई बार ऐसा भी होता है कि फिजिकल ग्लिच के बावजूद अकाउंट से पैसे कट जाते हैं और हाथ एक रुपया नहीं आता.
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि गलती से डेबिट हुए पैसों को बैंकों को ग्राहक के खाते में पांच वर्किंग डे के अंदर क्रेडिट करना होगा.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्पष्ट किया है कि गलती से डेबिट हुए पैसों को बैंकों को ग्राहक के खाते में पांच वर्किंग डे के अंदर क्रेडिट करना होगा.
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RBI के इस नियम से कई लोग अनजान होंगे, मगर बैंक पांच दिन में अगर ये पैसे नहीं वापस डाल पाया तो उसके बाद उसपर प्रति दिन देरी पर 100 रुपये का जुर्माना लगेगा.
RBI के इस नियम से कई लोग अनजान होंगे, मगर बैंक पांच दिन में अगर ये पैसे नहीं वापस डाल पाया तो उसके बाद उसपर प्रति दिन देरी पर 100 रुपये का जुर्माना लगेगा.
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टेक्निकल ग्लिच के बारे में तो आप कुछ नहीं कर सकते. लेकिन जब भी ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो पाए, तो तुरंत विदड्रॉल के नोटिफिकेशन को चेक करना चाहिए. बैंक बैलेंस का तुरंत पता लगाएं और सुनिश्चित करें कि कोई भी पैसा डिडक्ट न हुआ हो.
टेक्निकल ग्लिच के बारे में तो आप कुछ नहीं कर सकते. लेकिन जब भी ट्रांजैक्शन पूरा नहीं हो पाए, तो तुरंत विदड्रॉल के नोटिफिकेशन को चेक करना चाहिए. बैंक बैलेंस का तुरंत पता लगाएं और सुनिश्चित करें कि कोई भी पैसा डिडक्ट न हुआ हो.
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ट्रांजैक्शन फेल होने की स्थिति में ग्राहक को अपनी तरफ से कोई शिकायत दर्ज नहीं करानी होती है. RBI के नियमों के मुताबिक, बैंकों को खुद ही तुरंत इसपर काम करना होता है. यह प्रक्रिया डिफॉल्ट तरीके से होनी चाहिए.
ट्रांजैक्शन फेल होने की स्थिति में ग्राहक को अपनी तरफ से कोई शिकायत दर्ज नहीं करानी होती है. RBI के नियमों के मुताबिक, बैंकों को खुद ही तुरंत इसपर काम करना होता है. यह प्रक्रिया डिफॉल्ट तरीके से होनी चाहिए.
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IMAGE: pixabay, यह OTP-आधारित ट्रांजैक्शन होता है, जिसमें सिक्योरिटी बहुत मजबूत होती है. इसमें फर्जीवाड़े को अंजाम देना बहुत ही कठिन होता है. इस सेवा में ग्राहक का मोबाइल नंबर बैंक में पंजीकृत होना चाहिए.
IMAGE: pixabay, यह OTP-आधारित ट्रांजैक्शन होता है, जिसमें सिक्योरिटी बहुत मजबूत होती है. इसमें फर्जीवाड़े को अंजाम देना बहुत ही कठिन होता है. इस सेवा में ग्राहक का मोबाइल नंबर बैंक में पंजीकृत होना चाहिए.
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हालांकि, ऐसा करना कोई जरूरी नहीं है. बल्कि, पैसा पांच दिनों में नहीं लौटा पाने की स्थिति में बैंक को मुआवजा भरना होगा, चाहे शिकायत दर्ज कराई गई हो या नहीं.
हालांकि, ऐसा करना कोई जरूरी नहीं है. बल्कि, पैसा पांच दिनों में नहीं लौटा पाने की स्थिति में बैंक को मुआवजा भरना होगा, चाहे शिकायत दर्ज कराई गई हो या नहीं.
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अगर गलती से डिडक्ट हुई राशि आपके खाते में 30 दिन बाद भी नहीं क्रेडिट होती है, तो आप बैंक के शिकायत निवारण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के पास मामला पहुंचाकर इश्यू रिसॉल्व करा सकते हैं.
अगर गलती से डिडक्ट हुई राशि आपके खाते में 30 दिन बाद भी नहीं क्रेडिट होती है, तो आप बैंक के शिकायत निवारण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के पास मामला पहुंचाकर इश्यू रिसॉल्व करा सकते हैं.

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