वित्त वर्ष 2021-22 के बजट अनुमान के आधे को पार कर गया डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन

कोरोना की दूसरी लहर के बाद दिखी आर्थिक सुधार की संभावना, अनुमान के आधे को पार कर गया 2021-22 का प्रत्यक्ष टैक्स कलेक्शन

  • Money9 Hindi
  • Updated On - September 18, 2021 / 01:55 PM IST
वित्त वर्ष 2021-22 के बजट अनुमान के आधे को पार कर गया डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन
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रिफंड के बाद केंद्र का प्रत्यक्ष कर संग्रह (direct tax collection) 16 सितंबर तक वित्त वर्ष 2021-22 के बजट अनुमानों को आधा पार कर गया है. दूसरी तिमाही के लिए एक मजबूत एडवांस टैक्स कलेक्शन हुआ है. बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक एडवांस टैक्स की दूसरी किस्त के भुगतान के बाद पिछले साल 3.28 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इस साल कलेक्शन 5.66 लाख करोड़ रुपये रहा. कोरोना की दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था कुछ सुधार की राह पर दिखाई दे रही है.

वर्ष 2019-20 में कलेक्शन 4.4 ट्रिलियन रुपये था

चालू वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान 11.08 लाख करोड़ रुपये है. पूर्व-कोविड वर्ष 2019-20 की इसी अवधि के दौरान टैक्स कलेक्शन 4.4 ट्रिलियन रुपये था. रिफंड से पहले कलेक्शन 6.4 ट्रिलियन रुपये था, जो पिछले साल की तुलना में 47 फीसद अधिक है लेकिन साल 2019-20 की तुलना में 18 फीसद कम है. 74,000 करोड़ रुपये का रिफंड पिछले साल के 1.06 ट्रिलियन रुपये और 2019-20 में 1.01 ट्रिलियन रुपये के मुकाबले था.

कई सालों के बाद दिखा बेहतर प्रदर्शन

इंडिया रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि टैक्स कलेक्शन के संबंध में वित्त वर्ष 2021-22 के बजट प्रस्ताव में कई सालों के बाद ये प्रदर्शन देखने को मिला है. देवेंद्र ने बताया कि हमने बजट प्रस्तुति के बाद कहा था कि इस बार सरकार अपने राजस्व प्राप्ति पूर्वानुमान को पूरा करने में सक्षम होगी. वित्त वर्ष 20 की तुलना में वित्त वर्ष 2021-22 में टैक्स कलेक्शन का प्रदर्शन सराहनीय है, जबकि प्रत्यक्ष कर संग्रह ( direct tax collection) में वृद्धि से पता चलता है कि आर्थिक सुधार मजबूत हो रहा है. पंत ने कहा कि अभी भी कई सेक्टर संकट से बाहर नहीं आये हैं इसलिए यह अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी कि अर्थव्यवस्था संकट से बाहर है.

प्रत्यक्ष करों में आयकर और निगम कर शामिल

ICRA (Investment Information and Credit Rating Agency of India) की चीफ अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि गैर-कृषि अर्थव्यवस्था के औपचारिक टैक्स-भुगतान वाले हिस्से ने शेष राशि की कीमत पर बाजार हिस्सेदारी हासिल कर ली है, जो कि विमुद्रीकरण (demonetisation), जीएसटी और साथ ही कोविड के झटके से उत्पन्न संरचनात्मक बदलावों से लाभान्वित हुआ है. प्रत्यक्ष करों में आयकर और निगम कर शामिल हैं. निगम टैक्स कलेक्शन 3.01 ट्रिलियन रुपये रहा, जो पिछले साल के 1.65 ट्रिलियन रुपये से 82 फीसद अधिक है. यह भी 2019-20 के मुकाबले 26 फीसदी ज्यादा है. 2.52 ट्रिलियन रुपये का व्यक्तिगत आयकर कलेक्शन पिछले साल के 1.55 ट्रिलियन रुपये की तुलना में 63 फीसद अधिक है और 2019-20 में 2.38 ट्रिलियन रुपये से 5.88 फीसद अधिक है.

प्रत्यक्ष कर में बेंगलुरु ने की 52 की वृद्धि

प्रत्यक्ष कर में बेंगलुरु, दिल्ली और चेन्नई ने क्रमशः 52 फीसद, 63 फीसद और 75 फीसद की वृद्धि दर्ज की. अधिकारियों ने इस वित्तीय वर्ष में बेहतर आर्थिक दृष्टिकोण के लिए मजबूत टैक्स कलेक्शन को जिम्मेदार ठहराया है. और इसके साथ ही केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के साथ माल और सेवा कर डेटा साझा करने के कारण अनुपालन (compliance) और प्रवर्तन में वृद्धि हुई है. पहली तिमाही में एडवांस टैक्स कलेक्शन कर पिछले साल की तुलना में 1.5 गुना बढ़ा. एडवांस टैक्स का भुगतान तब किया जाता है जब धन वित्तीय वर्ष के अंत के बजाय चार किश्तों में अर्जित किया जाता है. इसे इकोनॉमिक सेंटीमेंट का संकेत माना जाता है.

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