VIDEO: एक साल में कितना बदला कोरोनावायरस, क्या लॉकडाउन से रुकेगा संक्रमण, देखिए डॉ विवेक नांगिया के साथ खास चर्चा

डॉ नांगिया का कहना है कि कि इस बार संक्रमण पहले बच्चों और युवाओं में हो रहा है और उसके बाद उनसे बुजुर्गों में Coronavirus फैल रहा है.

VIDEO: एक साल में कितना बदला कोरोनावायरस, क्या लॉकडाउन से रुकेगा संक्रमण, देखिए डॉ विवेक नांगिया के साथ खास चर्चा

हाल ही में कई रिपोर्ट में ये दावा किया गया है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) हवा से जरिए फैलता है. लेकिन मैक्स हॉस्पिटल, साकेत के पल्मेनोलॉजी के प्रिंसिपल डायरेक्टर और हेड डॉ विवेक नांगिया का कहना है कि इससे घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि ये कोई नई जानकारी नहीं है. उनका कहना है कि वायरस जैसे पहले फैलता था अब भी वैसे ही फैलता है – किसी संक्रमित के खांसने से या उनके जरिए उनके संपर्क में आए लोगों को. 6 फीट से ज्यादा की दूरी बनाने पर संक्रमण का खतरा कम है. लेकिन वहीं अगर आप अपनी बाल्कनी या छत पर हैं किसी संक्रमित से दूर तो आपको संक्रमण का खतरा नहीं है.

पिछले एक साल में दिल्ली में ये कोरोना (Coronavirus) की चौथी लहर है तो वहीं भारत कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहा है. एक दिन में देशभर में 2.73 लाख नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं.

डॉ नांगिया का कहना है कि पिछली बार के मुकाबले इसस बार संक्रमण ज्यादा तेजी से फैल रहा है. पिछली बार संक्रमण का आर-नॉट (R0) अगर 2 था तो उनके मुताबिक इस बार के संक्रमण में ये 4 से 4.5 पर है. वे कहते हैं कि इस बार पहले संक्रमण बच्चों और युवाओं में हो रहा है और उसके बाद उनसे बुजुर्गों में संक्रमण फैल रहा है.
लोगों में वैक्सीन (COVID-19 Vaccine) को लेकर झिझक के पीछे एक वजह ये भी है कि वैक्सीन लगने के बावजूद कई लोग कोरोना पॉजिटिव हुए हैं. इसपर सफाई के साथ सफाई देते हुए डॉ नांगिया ने कहा कि वैक्सीन लोगों को कोरोना के गंभीर संक्रमण की संभावना कम करती है. जिन्हें वैक्सीन लगाई गई है उनमें कोविड-19 की वजह से मृत्यु की आशंका नहीं रहती. वैक्सीन के दोनों डोज लगने के 2 से 4 हफ्तों के बाद इम्युनिटी क्षमता बढ़ती है.
वहीं अगर आप घर पर क्वारंटीन हैं तो डॉ नांगिया के मुताबिक आपको ये ध्यान रखना है कि आप 6 मिनट टहलने के अंतराल पर अपना ऑक्सीजन स्तर चेक करें. अगर ये स्तर 94 फीसदी के नीचे है तो तुरंत अस्पताल से संपर्क करें . हालांकि ऑक्सीजन की जरूरत होने पर ये सुविधा अस्पतालों में ही मिलेगी. ऑक्सीजन देने की स्थिति में मरीज को साथ में कई और इलाज की जरूरत पड़ती है, सिर्फ ऑक्सीजन देने पर निर्भर नहीं रहा जा सकता.
रेमडेसिविर दवाओं से लेकर बेड उपलब्धता पर जानिए डॉ विवेक नांगिया ने क्या कहा, इस खास चर्चा में –

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