शिकंजी के रेट सुनकर उड़ गए गुप्ता जी के होश

बड़े उदास गुमसुम गुप्‍ता जी पहुंचे रामू की दुकान पर... गुल्‍लू तो जमे ही थे अखबार लिए. रामू अब चाय की जगह लस्सी और शिकंजी बेच रहे हैं. महंगी बिजली और

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